योग्य चलना: मसीह में नई जिंदगी जीना — यह अध्ययन हमें सिखाता है कि जब परमेश्वर ने हमें बुलाया है, तो हमें उसके योग्य जीवन जीना चाहिए। पौलुस बताते हैं कि कलीसिया में एकता कैसे बनी रहे — नम्रता, धीरज और प्रेम से। हम सीखेंगे कि पुराने तरीके को छोड़कर नए तरीके से कैसे जिएं। यह अध्ययन हमें दिखाता है कि परमेश्वर चाहता है कि हम अपने रोजमर्रा के काम में, बातचीत में और रिश्तों में उसके जैसे बनें। हम समझेंगे कि मसीह में नई जिंदगी का मतलब क्या है और इसे कैसे जिएं।
ऐतिहासिक संदर्भ
पौलुस ने यह पत्री इफिसुस की कलीसिया को लगभग 60-62 ईस्वी में लिखी थी जब वह रोम में कैद था। पहले तीन अध्यायों में उन्होंने मसीह में हमारी आत्मिक आशीषों के बारे में बताया। अब चौथे अध्याय से वह व्यावहारिक जीवन की बात करते हैं — कि हमें कैसे जीना चाहिए।
पवित्रशास्त्र का अंश
इफिसियों 4:1-32
व्याख्या और अंतर्दृष्टि
इफिसियों 4 में पौलुस एक बड़ा बदलाव करते हैं — वह सिद्धांत से व्यवहार की ओर जाते हैं। पहले तीन अध्यायों में उन्होंने बताया कि परमेश्वर ने हमारे लिए क्या किया है, अब वह बताते हैं कि हमें कैसे जीना चाहिए। वह कहते हैं, "जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए हो उसके योग्य चलो" (इफिसियों 4:1)। इसका मतलब है कि परमेश्वर ने हमें एक खास काम के लिए बुलाया है और हमें उस बुलाहट के मुताबिक जीना चाहिए। यह बुलाहट सिर्फ रविवार को कलीसिया जाने की नहीं है, बल्कि हर दिन, हर जगह परमेश्वर के जैसे जीने की है। पौलुस चार बातें बताते हैं जो इस योग्य चलने में जरूरी हैं — नम्रता, कोमलता, धीरज और प्रेम में एक दूसरे को सहना (इफिसियों 4:2)। ये चार बातें हमारे रिश्तों को मजबूत बनाती हैं। नम्रता का मतलब है कि हम खुद को दूसरों से बड़ा न समझें। कोमलता का मतलब है कि हम दूसरों के साथ नरमी से पेश आएं। धीरज का मतलब है कि जब कोई हमें परेशान करे तो हम गुस्सा न करें। और प्रेम में सहने का मतलब है कि हम दूसरों की कमजोरियों को माफ करें और उन्हें स्वीकार करें।
पौलुस आगे बताते हैं कि कलीसिया की एकता सात बातों पर आधारित है — एक शरीर, एक आत्मा, एक आशा, एक प्रभु, एक विश्वास, एक बपतिस्मा, एक परमेश्वर (इफिसियों 4:4-6)। ये सात बातें हमें याद दिलाती हैं कि हम सब एक ही परिवार के हैं। हम सब एक ही शरीर के अंग हैं जिसका सिर मसीह है। हम सब में एक ही पवित्र आत्मा रहता है। हम सब की एक ही आशा है — स्वर्ग में मसीह के साथ रहना। हम सब का एक ही प्रभु है — यीशु मसीह। हम सब का एक ही विश्वास है — कि यीशु ने हमें बचाया है। हम सब ने एक ही बपतिस्मा लिया है — जो दिखाता है कि हम मसीह के साथ मर गए और जी उठे। और हम सब का एक ही परमेश्वर और पिता है। पौलुस यह भी बताते हैं कि परमेश्वर ने कलीसिया को अलग-अलग वरदान दिए हैं — कुछ प्रेरित, कुछ भविष्यवक्ता, कुछ सुसमाचार प्रचारक, कुछ पास्टर और शिक्षक (इफिसियों 4:11)। ये सब वरदान इसलिए दिए गए हैं ताकि परमेश्वर के लोग तैयार हों और कलीसिया मजबूत बने। जब हम सब अपने-अपने वरदान का सही इस्तेमाल करते हैं, तो पूरी कलीसिया बढ़ती है और मसीह के जैसी बनती है। पौलुस फिर एक बड़ी बात कहते हैं — "पुराने मनुष्यत्व को उतार दो और नए मनुष्यत्व को पहन लो" (इफिसियों 4:22-24)। पुराना मनुष्यत्व वह जीवन है जो हम मसीह को जानने से पहले जीते थे — झूठ बोलना, चोरी करना, गुस्सा करना, गंदी बातें करना। नया मनुष्यत्व वह जीवन है जो परमेश्वर चाहता है कि हम जिएं — सच बोलना, मेहनत से काम करना, दूसरों की मदद करना, भले शब्द बोलना। यह बदलाव अपने आप नहीं होता, बल्कि हमें रोज यह फैसला करना पड़ता है कि हम पुराने तरीके को छोड़ें और नए तरीके को अपनाएं। पवित्र आत्मा हमारी मदद करता है इस बदलाव में, लेकिन हमें भी अपनी मर्जी से इसे चुनना पड़ता है।
- परमेश्वर की बुलाहट हमारे जीवन में बदलाव की मांग करती है।
- नम्रता का मतलब है अपने आप को दूसरों से बड़ा न समझना।
- धीरज रखना और प्रेम से पेश आना पवित्र आत्मा का फल है।
- कलीसिया में एकता तभी बनती है जब हम एक-दूसरे को सहन करें।
- यीशु मसीह ने हमें शांति का बंधन दिया है जो हमें जोड़े रखता है।
चिंतन के प्रश्न
- क्या आप अपने आप को दूसरों से बेहतर समझते हैं, या नम्रता से पेश आते हैं?
- जब कोई आपको गुस्सा दिलाता है, तो क्या आप धीरज रखते हैं या तुरंत गुस्सा हो जाते हैं?
- क्या आपकी कलीसिया या परिवार में किसी से आपकी अनबन है जिसे आप ठीक कर सकते हैं?
- आप इस हफ्ते किसी की मदद कैसे कर सकते हैं बिना किसी बदले की उम्मीद के?
- क्या आप रोज प्रार्थना और बाइबल पढ़ने का समय निकालते हैं?
- परमेश्वर ने आपको कैसे बुलाया है, और क्या आप उसके योग्य जी रहे हैं?
- आप अपने रिश्तों में एकता और प्रेम कैसे बढ़ा सकते हैं?
प्रार्थना के बिंदु
- हे प्रभु यीशु, मुझे नम्रता सिखाएं। मैं अक्सर अपने आप को दूसरों से बेहतर समझता हूं। मेरे दिल को बदलें और मुझे दूसरों की सेवा करने की इच्छा दें, जैसे आपने हमारी सेवा की।
- परमेश्वर, मुझे धीरज दें। जब लोग मुझे गुस्सा दिलाते हैं, तो मैं जल्दी गुस्सा हो जाता हूं। पवित्र आत्मा से मुझे शांति और संयम दें, ताकि मैं प्रेम से जवाब दे सकूं।
- प्रभु, मेरी कलीसिया और परिवार में एकता लाएं। जहां टूटे हुए रिश्ते हैं, वहां माफी और प्रेम लाएं। मुझे पहले कदम बढ़ाने की हिम्मत दें और दूसरों को माफ करने की शक्ति दें।
संबंधित वचन
- फिलिप्पियों 2:3-4
- कुलुस्सियों 3:12-14
- रोमियों 12:9-10
- गलातियों 5:22-23
- 1 पतरस 3:8-9
- इब्रानियों 10:24-25
- यूहन्ना 13:34-35
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