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इफिसियों 1: मसीह में धन्य

Disciplefy Team·19 अप्रैल 2026·5 मिनट पढ़ें

मसीह में आत्मिक आशीषें — यह अध्ययन हमें दिखाता है कि परमेश्वर ने हमें कितनी बड़ी आशीषें दी हैं। पौलुस बताता है कि परमेश्वर ने हमें दुनिया बनाने से पहले ही चुन लिया था। उसने हमें अपने बच्चे बनाने का फैसला किया। यीशु के लहू से हमें पापों की माफी मिली। पवित्र आत्मा ने हम पर मुहर लगाई कि हम परमेश्वर के हैं। ये सब आशीषें हमें मुफ्त में मिलीं, सिर्फ परमेश्वर के प्रेम और अनुग्रह से। यह अध्ययन हमें सिखाता है कि हम मसीह में कितने धन्य हैं और हमें परमेश्वर का धन्यवाद करना चाहिए।

ऐतिहासिक संदर्भ

पौलुस ने यह पत्री इफिसुस की कलीसिया को लगभग 60-62 ईस्वी में लिखी। इफिसुस एशिया माइनर का एक बड़ा शहर था। पौलुस ने वहां तीन साल सेवा की थी। यह पत्री परमेश्वर की महान योजना के बारे में बताती है — कैसे यहूदी और गैर-यहूदी दोनों मसीह में एक हो सकते हैं। पहला अध्याय हमारी आत्मिक आशीषों की सूची देता है।

पवित्रशास्त्र का अंश

इफिसियों 1:3-14

व्याख्या और अंतर्दृष्टि

इफिसियों 1:3-14 में पौलुस एक लंबी स्तुति लिखता है जो परमेश्वर की महानता को दिखाती है। वह कहता है कि परमेश्वर ने हमें स्वर्गीय जगहों में हर तरह की आत्मिक आशीष दी है। ये आशीषें सिर्फ इस दुनिया की नहीं हैं — ये आत्मिक और अनंत हैं। पहली आशीष यह है कि परमेश्वर ने हमें दुनिया बनाने से पहले ही चुन लिया था। इसका मतलब है कि परमेश्वर की योजना बहुत पुरानी है — हमारे जन्म से भी पहले की। उसने हमें इसलिए चुना कि हम पवित्र और निर्दोष बनें। दूसरी आशीष यह है कि परमेश्वर ने हमें अपने बच्चे बनाने का फैसला किया। यह गोद लेने जैसा है — हम परमेश्वर के परिवार में शामिल हो गए। तीसरी आशीष यह है कि यीशु के लहू से हमें छुटकारा मिला। छुटकारा का मतलब है कि हम पाप की गुलामी से आजाद हो गए। यीशु ने अपनी जान देकर हमारे पापों की कीमत चुकाई। चौथी आशीष यह है कि पवित्र आत्मा ने हम पर मुहर लगाई। यह मुहर दिखाती है कि हम परमेश्वर की संपत्ति हैं और वह हमारी रक्षा करता है।

इन आशीषों से हम कई महत्वपूर्ण सच्चाइयां सीखते हैं। पहली सच्चाई यह है कि उद्धार पूरी तरह से परमेश्वर का काम है। हमने कुछ नहीं किया — उसने हमें चुना, उसने हमें गोद लिया, उसने हमें छुड़ाया। यह सब उसके अनुग्रह से हुआ, हमारे कामों से नहीं। दूसरी सच्चाई यह है कि परमेश्वर का उद्देश्य अपनी महिमा दिखाना है। पौलुस तीन बार कहता है कि यह सब "उसकी महिमा की स्तुति के लिए" है। जब हम परमेश्वर की आशीषों को देखते हैं, तो हमें उसकी स्तुति करनी चाहिए। तीसरी सच्चाई यह है कि त्रिएक परमेश्वर — पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा — सब मिलकर हमारे उद्धार में काम करते हैं। पिता ने योजना बनाई, पुत्र ने उसे पूरा किया, और पवित्र आत्मा उसे हम पर लागू करता है। चौथी सच्चाई यह है कि हमारी आशीषें मसीह में हैं। पौलुस बार-बार कहता है "मसीह में" या "उसमें"। यीशु के बिना ये आशीषें नहीं मिल सकतीं। पांचवीं सच्चाई यह है कि पवित्र आत्मा हमारी विरासत की गारंटी है। वह हमें भविष्य की पूरी आशीषों का स्वाद देता है। जब हम इन सच्चाइयों को समझते हैं, तो हमारा दिल परमेश्वर के प्रति धन्यवाद से भर जाता है और हम उसकी सेवा करने के लिए उत्साहित हो जाते हैं।

चिंतन के प्रश्न

  1. क्या आप मानते हैं कि परमेश्वर ने आपको दुनिया बनाने से पहले ही चुन लिया था?
  2. परमेश्वर की आशीषों को जानने के बाद आपकी जिंदगी में क्या बदलाव आना चाहिए?
  3. आप अपने आसपास के लोगों को कैसे बता सकते हैं कि परमेश्वर उनसे प्यार करता है?
  4. जब आप डरते या परेशान होते हैं, तो क्या आप परमेश्वर को अपना पिता मानकर उससे मदद मांगते हैं?
  5. यीशु मसीह ने आपके लिए क्या किया और आप उसका शुक्रिया कैसे अदा कर सकते हैं?
  6. क्या आप रोज परमेश्वर के साथ समय बिताते हैं और उसकी बातें सुनते हैं?
  7. परमेश्वर के बच्चे होने का मतलब आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में क्या है?

प्रार्थना के बिंदु

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