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मत्ती का सुसमाचार

मत्ती 5:17-48: मसीह व्यवस्था को पूरा करते हैं

Disciplefy Team·10 जून 2026·7 मिनट पढ़ें

मसीह व्यवस्था को पूरा करते हैं — यह अध्ययन दिखाता है कि यीशु परमेश्वर की व्यवस्था को खत्म करने नहीं, बल्कि उसे पूरा करने आए। यीशु हमें सिखाते हैं कि परमेश्वर केवल बाहरी कामों को नहीं, बल्कि हमारे दिल की हालत को देखता है। क्रोध, गलत इच्छाएं, झूठ बोलना, बदला लेना — ये सब हमारे दिल की समस्याएं हैं जो परमेश्वर की नज़र में पाप हैं। यह अध्ययन हमें समझाता है कि परमेश्वर की धार्मिकता कितनी ऊंची है और हम अपनी कोशिश से उस तक नहीं पहुंच सकते। इसलिए हमें यीशु की ज़रूरत है जो हमारे लिए सिद्ध जीवन जिए और हमारे पापों के लिए मरे।

ऐतिहासिक संदर्भ

यीशु पहाड़ी उपदेश दे रहे हैं। भीड़ सोच रही है कि यीशु पुरानी व्यवस्था को बदलने आए हैं या नहीं। फरीसी बाहरी नियमों पर ज़ोर देते थे लेकिन दिल की हालत को भूल गए थे। यीशु यहां स्पष्ट करते हैं कि वह व्यवस्था को खत्म नहीं कर रहे, बल्कि उसका असली मतलब दिखा रहे हैं — परमेश्वर दिल की पवित्रता चाहता है।

पवित्रशास्त्र का अंश

मत्ती 5:17-48

व्याख्या और अंतर्दृष्टि

यीशु व्यवस्था को पूरा करने आए

यीशु बहुत साफ शब्दों में कहते हैं, "यह मत सोचो कि मैं व्यवस्था या भविष्यद्वक्ताओं को नष्ट करने आया हूं" (मत्ती 5:17)। यह बात बहुत ज़रूरी है क्योंकि कुछ लोग सोच रहे थे कि यीशु पुराने नियम को खत्म कर देंगे। लेकिन यीशु कहते हैं कि वह व्यवस्था को "पूरा" करने आए हैं। "पूरा करने" का मतलब है कि यीशु ने परमेश्वर की हर आज्ञा को सिद्धता से माना और उसका असली मतलब दिखाया। व्यवस्था परमेश्वर की पवित्रता को दिखाती है, और यीशु ही एकमात्र व्यक्ति हैं जिन्होंने उसे पूरी तरह से जिया। यीशु आगे कहते हैं कि "जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जाएं, व्यवस्था का एक मात्रा या बिंदु भी नहीं टलेगा" (मत्ती 5:18)। इसका मतलब है कि परमेश्वर का वचन हमेशा के लिए सच है और कभी बदलता नहीं। फिर यीशु चेतावनी देते हैं कि जो कोई इन आज्ञाओं को तोड़ता है और दूसरों को भी ऐसा सिखाता है, वह स्वर्ग के राज्य में छोटा कहलाएगा (मत्ती 5:19)। सबसे चौंकाने वाली बात यह है: "यदि तुम्हारी धार्मिकता शास्त्रियों और फरीसियों से बढ़कर न हो, तो तुम स्वर्ग के राज्य में कभी प्रवेश न करोगे" (मत्ती 5:20)। फरीसी बाहर से बहुत धार्मिक दिखते थे, लेकिन यीशु कह रहे हैं कि परमेश्वर को इससे भी ज़्यादा चाहिए — एक बदला हुआ दिल।

परमेश्वर दिल की पवित्रता चाहता है

यीशु अब छह उदाहरण देते हैं जहां वह कहते हैं, "तुमने सुना है... परन्तु मैं तुमसे कहता हूं।" यीशु दिखा रहे हैं कि परमेश्वर की व्यवस्था केवल बाहरी कामों के बारे में नहीं है, बल्कि दिल की हालत के बारे में है। पहला उदाहरण: व्यवस्था कहती है "हत्या मत करो," लेकिन यीशु कहते हैं कि अपने भाई पर क्रोध करना भी पाप है (मत्ती 5:21-22)। दूसरा: व्यवस्था कहती है "व्यभिचार मत करो," लेकिन यीशु कहते हैं कि बुरी नज़र से किसी को देखना भी दिल में व्यभिचार है (मत्ती 5:27-28)। तीसरा: तलाक के बारे में — यीशु दिखाते हैं कि परमेश्वर विवाह को पवित्र मानता है और तलाक केवल व्यभिचार की स्थिति में ही स्वीकार्य है (मत्ती 5:31-32)। चौथा: झूठी कसम न खाओ — यीशु कहते हैं कि हमारी बात इतनी सच्ची हो कि कसम की ज़रूरत ही न पड़े (मत्ती 5:33-37)। पांचवां: "आंख के बदले आंख" की जगह, यीशु कहते हैं कि बुराई का बदला मत लो, बल्कि दूसरा गाल भी फेर दो (मत्ती 5:38-42)। छठा: "अपने पड़ोसी से प्रेम करो" के साथ यीशु जोड़ते हैं, "अपने दुश्मनों से भी प्रेम करो और सताने वालों के लिए प्रार्थना करो" (मत्ती 5:43-44)। यह सब सुनकर हम समझ सकते हैं कि परमेश्वर की मांग कितनी ऊंची है। यीशु अंत में कहते हैं, "तुम सिद्ध बनो जैसे तुम्हारा स्वर्गीय पिता सिद्ध है" (मत्ती 5:48)। यह हमें दिखाता है कि हम अपनी कोशिश से कभी परमेश्वर के स्तर तक नहीं पहुंच सकते — हमें यीशु की ज़रूरत है जो हमारे लिए सिद्ध जीवन जिए और क्रूस पर हमारे पापों की सज़ा उठाई।

अपने दिल की जांच करें

यीशु की यह शिक्षा हमें अपने दिल को देखने के लिए बुलाती है। हम अक्सर सोचते हैं कि अगर हमने किसी को मारा नहीं, तो हम ठीक हैं। लेकिन यीशु कहते हैं कि गुस्सा और नफरत भी पाप है। जब आपका पति या पत्नी आपको परेशान करे, तो क्या आप मन में उनके खिलाफ बातें सोचते हैं? जब आपका साथी काम में आगे बढ़ जाए, तो क्या आप जलन महसूस करते हैं? जब कोई आपकी बेइज्जती करे, तो क्या आप बदला लेने की सोचते हैं? यीशु चाहते हैं कि हम अपने दिल की सच्चाई को पहचानें। परमेश्वर सिर्फ बाहरी कामों को नहीं, बल्कि हमारे मन के विचारों को भी देखता है। यह बात हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि हमें बदलने के लिए है। जब हम अपनी कमजोरी को मानते हैं, तभी हम परमेश्वर की मदद मांग सकते हैं।

इस हफ्ते क्या करें

इस हफ्ते हर रोज सोने से पहले पांच मिनट लें और अपने दिन को याद करें। क्या आपने किसी पर गुस्सा किया? क्या आपने किसी के बारे में बुरा सोचा? अगर हां, तो परमेश्वर से माफी मांगें और उस व्यक्ति के लिए प्रार्थना करें। जब कोई आपको गुस्सा दिलाए, तो तुरंत प्रतिक्रिया न दें। गहरी सांस लें और परमेश्वर से मदद मांगें कि वह आपके दिल को शांत करे। अगर आपने किसी से बुरा बर्ताव किया है, तो इस हफ्ते उनसे माफी मांगें। यह मुश्किल होगा, लेकिन यीशु की शिक्षा को जीने का यही तरीका है। हर सुबह प्रार्थना करें कि परमेश्वर आपके दिल को बदले और आपको प्रेम से भर दे। याद रखें, यह काम आप अकेले नहीं कर सकते। पवित्र आत्मा की शक्ति से ही हम अपने दिल को बदल सकते हैं। जब आप गिरें, तो हार न मानें। परमेश्वर के पास वापस आएं और फिर से कोशिश करें।

चिंतन के प्रश्न

  1. क्या आप अपने दिल में किसी के खिलाफ गुस्सा या नफरत रखते हैं?
  2. यीशु की शिक्षा आपके रिश्तों को कैसे बदल सकती है?
  3. क्या आप सिर्फ बाहरी कामों पर ध्यान देते हैं या अपने दिल की हालत पर भी?
  4. जब कोई आपको गुस्सा दिलाए, तो आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं?
  5. आप इस हफ्ते किस एक व्यक्ति के साथ अपना बर्ताव बदल सकते हैं?
  6. क्या आप मानते हैं कि पवित्र आत्मा आपके दिल को बदल सकता है?
  7. आप परमेश्वर से किस बात के लिए माफी मांगना चाहते हैं?

प्रार्थना के बिंदु

हे प्रभु यीशु, मैं आपके सामने अपने दिल को खोलता हूं। मैं जानता हूं कि मेरे दिल में गुस्सा, जलन और नफरत है। मैं सिर्फ बाहर से अच्छा दिखने की कोशिश करता हूं, लेकिन अंदर से मैं टूटा हुआ हूं। प्रभु, मुझे माफ कर दीजिए। मैं अपनी ताकत से अपने दिल को नहीं बदल सकता। मुझे आपकी पवित्र आत्मा की जरूरत है। मेरे दिल को साफ कर दीजिए और मुझे नया बना दीजिए। जब मुझे गुस्सा आए, तो मुझे याद दिलाइए कि मैं आपसे प्रार्थना करूं। जब मैं किसी से नफरत करने लगूं, तो मुझे उनके लिए प्रेम दीजिए। मुझे वह शक्ति दीजिए जो मुझे अपने दुश्मनों से भी प्रेम करने में मदद करे। प्रभु, मैं आपकी व्यवस्था को सिर्फ नियमों की तरह नहीं, बल्कि प्रेम की शिक्षा की तरह देखना चाहता हूं। मुझे हर दिन आपके करीब लाइए और मुझे आपकी तरह बनाइए। यीशु मसीह के नाम से, आमेन।

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