कैदखाने में आनंद की शक्ति यह अध्ययन है। पौलुस रोम की जेल में बंद है, फिर भी वह खुशी से भरा है क्योंकि सुसमाचार फैल रहा है। वह फिलिप्पी की कलीसिया को लिखता है कि परमेश्वर जो अच्छा काम शुरू करता है, वह उसे पूरा भी करेगा। पौलुस के लिए जीना मसीह है और मरना फायदा है। यह अध्ययन सिखाता है कि सच्चा आनंद हालात पर नहीं, बल्कि मसीह पर निर्भर करता है। हम सीखेंगे कि मुश्किलों में भी कैसे खुश रह सकते हैं और परमेश्वर के काम पर भरोसा कर सकते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
पौलुस ने यह पत्र लगभग 60-62 ईस्वी में रोम की जेल से लिखा। फिलिप्पी मकदुनिया का एक शहर था जहां पौलुस ने पहली यूरोपीय कलीसिया शुरू की थी। वहां के विश्वासी पौलुस से बहुत प्रेम करते थे और उसकी सेवा में मदद करते थे। अब पौलुस कैद में है, लेकिन उसका दिल आनंद से भरा है।
पवित्रशास्त्र का अंश
फिलिप्पियों 1:1-30
व्याख्या और अंतर्दृष्टि
फिलिप्पियों 1 में पौलुस एक अद्भुत सच्चाई दिखाता है - सच्चा आनंद हालात पर निर्भर नहीं करता। पौलुस रोम की जेल में बंद है, उसके हाथों में जंजीरें हैं, फिर भी वह खुशी से भरा है। क्यों? क्योंकि सुसमाचार फैल रहा है। पौलुस कहता है कि उसकी कैद से भी परमेश्वर का काम आगे बढ़ रहा है। महल के सिपाही और दूसरे लोग यीशु के बारे में सुन रहे हैं। कुछ लोग तो ईर्ष्या से प्रचार कर रहे हैं, लेकिन पौलुस को इससे भी खुशी है क्योंकि मसीह का नाम फैल रहा है। यह हमें सिखाता है कि जब हम अपने से ज्यादा परमेश्वर के काम की परवाह करते हैं, तब मुश्किलें भी हमारी खुशी नहीं छीन सकतीं। पौलुस आयत 6 में एक बड़ा वादा देता है - जिसने तुम में अच्छा काम शुरू किया है, वह उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। यह वादा हर विश्वासी के लिए है। परमेश्वर जो काम शुरू करता है, वह उसे बीच में नहीं छोड़ता। वह हमें बदलने का काम जारी रखता है जब तक हम यीशु जैसे नहीं बन जाते।
इस अध्याय से हम तीन बड़े सिद्धांत सीखते हैं। पहला, सच्चा आनंद मसीह में है, हालात में नहीं। पौलुस जेल में है लेकिन खुश है क्योंकि उसका ध्यान यीशु पर है। दूसरा, परमेश्वर हर हालत को अपनी महिमा के लिए इस्तेमाल कर सकता है। पौलुस की कैद से भी सुसमाचार फैल रहा है। तीसरा, मसीह में जीना और मरना दोनों फायदे हैं। आयत 21 में पौलुस कहता है, 'मेरे लिए जीवित रहना मसीह है और मरना लाभ है।' अगर वह जीता है तो मसीह की सेवा कर सकता है, अगर मरता है तो मसीह के साथ रहेगा। यह सोच हमें मौत के डर से आजाद करती है। पौलुस यह भी सिखाता है कि हमें सुसमाचार के योग्य जीवन जीना चाहिए। आयत 27 में वह कहता है कि हमारा चाल-चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो। इसका मतलब है कि हमारी जिंदगी यीशु को दिखाए। हम एक मन होकर सुसमाचार के लिए मिलकर मेहनत करें। यह अध्याय हमें सिखाता है कि विश्वासी की जिंदगी का मकसद मसीह को बड़ा करना है, चाहे जीवन हो या मौत।
- पौलुस जेल में था, फिर भी खुश था क्योंकि सुसमाचार फैल रहा था।
- परमेश्वर हमारे दिल में अच्छा काम करता है और उसे पूरा भी करता है।
- मुश्किलें परमेश्वर की योजना को नहीं रोक सकतीं, बल्कि उसे आगे बढ़ाती हैं।
- सच्ची खुशी परमेश्वर के साथ रिश्ते से आती है, न कि आसान जिंदगी से।
- परमेश्वर हर हालत में हमारे साथ है और हमारी मदद करता है।
चिंतन के प्रश्न
- क्या आप मुश्किलों में भी परमेश्वर का शुक्र कर सकते हैं?
- पौलुस जेल में खुश कैसे रह सका?
- आपकी जिंदगी में कौन सी मुश्किल है जिसमें आप परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं?
- क्या आप रोज परमेश्वर को धन्यवाद देने का समय निकालते हैं?
- आप किसी को कैसे बता सकते हैं कि परमेश्वर आपकी मदद कर रहा है?
- जब आप डरते हैं, तो क्या आप प्रार्थना करते हैं या चिंता करते हैं?
- परमेश्वर ने आपकी जिंदगी में कौन सा अच्छा काम शुरू किया है?
प्रार्थना के बिंदु
- हे प्रभु यीशु, मुझे मुश्किलों में भी खुश रहना सिखा। जब परेशानी आए, तो मुझे याद दिला कि तू मेरे साथ है। मेरे दिल में तेरी शांति भर दे ताकि मैं हर हालत में तेरा शुक्र कर सकूं। यीशु मसीह के नाम से, आमेन।
- हे परमेश्वर, मेरे परिवार और दोस्तों को भी तेरी खुशी दे। जब वे मुश्किल में हों, तो उन्हें तेरे प्रेम का एहसास करा। मुझे उनकी मदद करने की हिम्मत दे और उन्हें तेरे बारे में बताने का मौका दे। यीशु मसीह के नाम से, आमेन।
- हे प्रभु, मुझे रोज तेरे वचन पढ़ने में मदद कर। मेरे दिल को बदल दे ताकि मैं तेरी बातों को समझूं और उन पर चलूं। मुझे विश्वास दे कि तू जो काम शुरू करता है, उसे पूरा भी करता है। यीशु मसीह के नाम से, आमेन।
संबंधित वचन
- रोमियों 8:28
- याकूब 1:2-4
- 1 थिस्सलुनीकियों 5:16-18
- भजन संहिता 34:1
- फिलिप्पियों 4:4-7
- 2 कुरिन्थियों 12:9-10
- इब्रानियों 12:2
यह अध्ययन मार्गदर्शिका Disciplefy द्वारा तैयार की गई है। पूर्ण इंटरैक्टिव अनुभव के लिए ऐप डाउनलोड करें — अभ्यास मोड, ऑडियो और बहुत कुछ।