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रोमियों: सुसमाचार का प्रकाशन

रोमियों 9: परमेश्वर का चुनाव

Disciplefy Team·7 अप्रैल 2026·5 मिनट पढ़ें

परमेश्वर का चुनाव: उसकी दया और संप्रभुता की समझ। रोमियों 9 हमें दिखाता है कि परमेश्वर अपनी इच्छा के अनुसार लोगों को चुनता है। यह चुनाव उसकी दया पर आधारित है, न कि हमारे कामों पर। पौलुस इस्राएल के इतिहास से उदाहरण देता है कि कैसे परमेश्वर ने याकूब को चुना और एसाव को नहीं। यह हमें सिखाता है कि परमेश्वर का चुनाव उसकी महिमा के लिए है। हम सीखेंगे कि परमेश्वर की संप्रभुता और मनुष्य की जिम्मेदारी दोनों सच हैं। यह अध्ययन हमें विनम्रता और आभार के साथ जीने में मदद करेगा।

ऐतिहासिक संदर्भ

पौलुस ने रोमियों की कलीसिया को यह पत्र लगभग 57 ईस्वी में लिखा। अध्याय 1-8 में उसने सुसमाचार की व्याख्या की। अब अध्याय 9-11 में वह एक कठिन सवाल का जवाब देता है: अगर यीशु मसीहा है, तो इस्राएल ने उसे क्यों नहीं माना? पौलुस दिखाता है कि परमेश्वर का वादा असफल नहीं हुआ, बल्कि उसका चुनाव हमेशा से उसकी दया पर आधारित रहा है।

पवित्रशास्त्र का अंश

रोमियों 9:1-29

व्याख्या और अंतर्दृष्टि

रोमियों 9 में पौलुस एक गहरी सच्चाई सिखाता है: परमेश्वर अपनी इच्छा के अनुसार लोगों को चुनता है। पौलुस का दिल अपने यहूदी भाइयों के लिए दुखी है क्योंकि उन्होंने मसीह को नहीं माना। वह कहता है कि परमेश्वर के वादे असफल नहीं हुए, क्योंकि सभी इस्राएली सच्चे इस्राएली नहीं हैं। परमेश्वर ने हमेशा चुनाव किया है - इब्राहीम के दो बेटों में से इसहाक को चुना, इश्माएल को नहीं। इसहाक के दो बेटों में से याकूब को चुना, एसाव को नहीं। यह चुनाव उनके जन्म से पहले हुआ, जब उन्होंने कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं किया था। पौलुस स्पष्ट करता है कि यह चुनाव परमेश्वर की दया पर आधारित है, न कि मनुष्य के कामों पर। परमेश्वर ने मूसा से कहा, 'मैं जिस पर दया करना चाहूं, उस पर दया करूंगा' (रोमियों 9:15)। यह हमें दिखाता है कि उद्धार पूरी तरह से परमेश्वर की कृपा का काम है।

इस अध्याय से हम तीन महत्वपूर्ण सिद्धांत सीखते हैं। पहला, परमेश्वर पूरी तरह से संप्रभु है - वह अपनी इच्छा के अनुसार काम करता है। पौलुस कुम्हार और मिट्टी का उदाहरण देता है: क्या मिट्टी कुम्हार से कह सकती है कि तूने मुझे ऐसा क्यों बनाया? दूसरा, परमेश्वर का चुनाव उसकी दया को दर्शाता है। वह किसी को भी बचाने के लिए बाध्य नहीं था, लेकिन उसने अपनी दया से कुछ को चुना। तीसरा, यह सब परमेश्वर की महिमा के लिए है। पौलुस कहता है कि परमेश्वर ने अपनी महिमा का धन दिखाने के लिए दया के पात्रों को तैयार किया। यह सिद्धांत हमें विनम्र बनाता है क्योंकि हम समझते हैं कि उद्धार हमारे कामों से नहीं, बल्कि परमेश्वर की दया से है। यह हमें आभारी भी बनाता है क्योंकि हम जानते हैं कि हम उसकी कृपा के कारण ही बचाए गए हैं। यशायाह 53:6 कहता है, 'हम सब भेड़ों के समान भटक गए थे, परन्तु यहोवा ने हम सब के अधर्म का बोझ उसी पर रख दिया।' यह हमें याद दिलाता है कि मसीह में परमेश्वर का चुनाव उसके प्रेम और दया का सबसे बड़ा प्रमाण है।

चिंतन के प्रश्न

  1. परमेश्वर के चुनाव की सच्चाई आपके घमंड को कैसे कम करती है?
  2. जब कोई सुसमाचार को ठुकराता है, तो आप कैसे प्रतिक्रिया देते हैं - निराशा से या प्रार्थना से?
  3. क्या आप अपने उद्धार को परमेश्वर की दया का नतीजा मानते हैं या अपनी अच्छाई का?
  4. आप अपने परिवार के अविश्वासी सदस्यों के लिए कितनी गंभीरता से प्रार्थना करते हैं?
  5. परमेश्वर की संप्रभुता पर भरोसा करना आपके लिए कब मुश्किल होता है?
  6. आप दूसरे विश्वासियों के साथ कैसे नम्रता दिखा सकते हैं इस हफ्ते?
  7. क्या आप परमेश्वर की योजना को स्वीकार करते हैं, भले ही आप सब कुछ न समझें?

प्रार्थना के बिंदु

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