आत्मिक वरदान और उनका उपयोग - यह अध्ययन हमें सिखाता है कि पवित्र आत्मा हर विश्वासी को खास क्षमताएं देता है जिन्हें आत्मिक वरदान कहते हैं। ये वरदान हमारी अपनी महिमा के लिए नहीं बल्कि कलीसिया को मजबूत करने और परमेश्वर की महिमा के लिए दिए गए हैं। हम सीखेंगे कि अपने वरदानों को कैसे पहचानें, उन्हें प्रेम के साथ कैसे इस्तेमाल करें, और दूसरे विश्वासियों की सेवा कैसे करें। यह अध्ययन हमें दिखाएगा कि हर विश्वासी जरूरी है और सबके वरदान मिलकर मसीह के शरीर को पूरा बनाते हैं। हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इन वरदानों को विनम्रता और एकता के साथ कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं, यह सीखेंगे।
ऐतिहासिक संदर्भ
प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की कलीसिया को यह पत्र लगभग 55 ईस्वी में लिखा था। कुरिन्थुस की कलीसिया में आत्मिक वरदानों को लेकर गलतफहमी और घमंड की समस्या थी। कुछ लोग अपने वरदानों पर घमंड करते थे और दूसरों को छोटा समझते थे। पौलुस ने उन्हें सिखाया कि सभी वरदान पवित्र आत्मा की ओर से हैं और सबका मकसद कलीसिया की भलाई करना है।
पवित्रशास्त्र का अंश
1 कुरिन्थियों 12:1-31
व्याख्या और अंतर्दृष्टि
पौलुस शुरुआत में कहता है कि वह नहीं चाहता कि विश्वासी आत्मिक वरदानों के बारे में अनजान रहें। पवित्र आत्मा अलग-अलग वरदान देता है - किसी को ज्ञान की बात, किसी को विश्वास, किसी को चंगाई की शक्ति, किसी को भविष्यवाणी करने की क्षमता। लेकिन सब वरदान एक ही पवित्र आत्मा की ओर से आते हैं। पौलुस यह साफ करता है कि ये वरदान हमारी अपनी योग्यता से नहीं मिलते बल्कि पवित्र आत्मा अपनी मर्जी से बांटता है। हर वरदान का मकसद है - सबकी भलाई करना, न कि अपनी महिमा करना। पौलुस शरीर के उदाहरण से समझाता है कि जैसे शरीर में अलग-अलग अंग होते हैं, वैसे ही कलीसिया में अलग-अलग वरदान वाले लोग हैं। आंख हाथ से नहीं कह सकती कि मुझे तेरी जरूरत नहीं, और सिर पैरों से नहीं कह सकता कि तुम बेकार हो। हर अंग जरूरी है और हर विश्वासी का वरदान कलीसिया के लिए जरूरी है। जो अंग कमजोर दिखते हैं, वे भी बहुत जरूरी होते हैं।
इस शिक्षा से हम सीखते हैं कि परमेश्वर ने हर विश्वासी को खास बनाया है और सबको कुछ न कुछ वरदान दिया है। कोई भी विश्वासी बेकार नहीं है। जिसे प्रचार का वरदान नहीं मिला, उसे शायद सेवा का या देने का वरदान मिला हो। हमें दूसरों से अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए और न ही घमंड करना चाहिए। सभी वरदान मिलकर कलीसिया को मजबूत बनाते हैं। पौलुस यह भी सिखाता है कि प्रेम के बिना सारे वरदान बेकार हैं - यह बात वह अगले अध्याय में और गहराई से समझाता है। हमारा मकसद होना चाहिए कि हम अपने वरदानों को विनम्रता से इस्तेमाल करें, दूसरों की सेवा करें, और परमेश्वर की महिमा करें। जब हम अपने वरदानों को सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं, तो कलीसिया बढ़ती है और लोग यीशु मसीह को देखते हैं। परमेश्वर ने हमें एक टीम की तरह बनाया है जहां हर कोई अपनी जगह पर जरूरी है और सबको मिलकर काम करना है।
आत्मिक वरदानों को अपनी जिंदगी में कैसे इस्तेमाल करें? सबसे पहले, परमेश्वर से प्रार्थना में पूछें कि उसने आपको कौन सा खास वरदान दिया है। देखें कि आप किस काम में अच्छे हैं और कहां आपका दिल दूसरों की मदद करने को करता है। अगर आप अच्छे से समझा सकते हैं, तो शायद आपको सिखाने का वरदान है। अगर आप दूसरों की परेशानी देखकर मदद करना चाहते हैं, तो सेवा का वरदान हो सकता है। अपने वरदान को छुपाकर मत रखें। कलीसिया में जहां जरूरत है, वहां अपनी क्षमता का इस्तेमाल करें। याद रखें, आपका वरदान सिर्फ आपके लिए नहीं है, बल्कि पूरी कलीसिया को मजबूत करने के लिए है। जब आप अपना वरदान प्रेम से इस्तेमाल करते हैं, तो परमेश्वर की महिमा होती है और लोगों को आशीर्वाद मिलता है।
इस हफ्ते तीन काम जरूर करें। पहला, अपनी कलीसिया के किसी बड़े विश्वासी से बात करें और पूछें कि वे आपमें कौन सा वरदान देखते हैं। दूसरा, कलीसिया में किसी एक सेवा में शामिल हों — चाहे बच्चों को पढ़ाना हो, सफाई करना हो, या किसी जरूरतमंद की मदद करना हो। तीसरा, हर दिन प्रार्थना करें कि पवित्र आत्मा आपको अपने वरदान को सही तरीके से इस्तेमाल करने की समझ दे। जब आप अपने घर में हों, तो अपने परिवार की सेवा करें — यह भी आपके वरदान को इस्तेमाल करने का तरीका है। अगर आपको प्रोत्साहन देने का वरदान है, तो अपने साथी विश्वासियों को हिम्मत देने वाले शब्द बोलें। जब मुश्किल आए, तो याद रखें कि परमेश्वर ने आपको एक खास मकसद के लिए बनाया है। आपका वरदान परमेश्वर का तोहफा है — इसे विनम्रता और प्रेम से इस्तेमाल करें, और देखें कि परमेश्वर कैसे आपके जरिए काम करता है।
चिंतन के प्रश्न
- आपको क्या लगता है कि परमेश्वर ने आपको कौन सा आत्मिक वरदान दिया है?
- आप अपने वरदान को कलीसिया में कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं?
- क्या आप अपने वरदान को अपनी महिमा के लिए या परमेश्वर की महिमा के लिए इस्तेमाल करते हैं?
- आपकी कलीसिया में किन वरदानों की सबसे ज्यादा जरूरत है?
- आप दूसरे विश्वासियों के वरदानों को कैसे प्रोत्साहित कर सकते हैं?
- क्या आप अपने वरदान को विनम्रता और प्रेम से इस्तेमाल करते हैं?
- आत्मिक वरदान और सांसारिक प्रतिभा में क्या फर्क है?
प्रार्थना के बिंदु
- हे प्रभु यीशु, मुझे दिखाएं कि आपने मुझे कौन सा आत्मिक वरदान दिया है। मुझे समझ दें कि मैं इसे कैसे इस्तेमाल करूं ताकि आपकी कलीसिया मजबूत हो और आपकी महिमा हो। मुझे विनम्र बनाएं ताकि मैं अपने वरदान पर घमंड न करूं।
- पवित्र आत्मा, मुझे अपने वरदान को प्रेम से इस्तेमाल करने की शक्ति दें। मुझे दूसरों की सेवा करने का दिल दें और मुझे याद दिलाएं कि यह वरदान आपका तोहफा है। मुझे अपनी इच्छा नहीं बल्कि आपकी इच्छा पूरी करने में मदद करें।
- हे परमेश्वर, मेरी कलीसिया को आशीर्वाद दें। हर विश्वासी को उनके वरदान को पहचानने और इस्तेमाल करने में मदद करें। हमें एकता में काम करने दें ताकि आपका राज्य बढ़े और लोग आपको जानें। हमें स्वार्थ से बचाएं और प्रेम में बढ़ाएं।
संबंधित वचन
- रोमियों 12:3-8
- इफिसियों 4:11-16
- 1 पतरस 4:10-11
- 1 कुरिन्थियों 14:1-5
- प्रेरितों के काम 2:1-4
- यूहन्ना 14:26
- गलातियों 5:22-23