यीशु का दफनाया जाना — जब सब कुछ खत्म लगा। यह अध्ययन हमें दिखाता है कि जब यीशु को कब्र में रखा गया, तो उनके शिष्यों को लगा कि सब कुछ खत्म हो गया। पर यह सच नहीं था — यह परमेश्वर की बड़ी योजना का एक जरूरी हिस्सा था। हम सीखेंगे कि कैसे अरिमतिया के यूसुफ ने हिम्मत दिखाई और यीशु के शरीर को सम्मान से दफनाया। यह हमें सिखाता है कि जब हमारी जिंदगी में अंधेरा आता है, तब भी परमेश्वर काम कर रहा है। हम देखेंगे कि दुख के बीच में भी परमेश्वर की योजना चल रही थी।
ऐतिहासिक संदर्भ
यीशु को क्रूस पर मारा गया था। यह शुक्रवार की शाम थी और सब्त का दिन शुरू होने वाला था। यहूदी कानून के मुताबिक, मरे हुए शरीर को जल्दी दफनाना जरूरी था। अरिमतिया का यूसुफ एक अमीर आदमी था और यहूदी अगुवों में से एक था, पर वह चुपके से यीशु का चेला था।
पवित्रशास्त्र का अंश
मत्ती 27:57-61
व्याख्या और अंतर्दृष्टि
जब यीशु क्रूस पर मर गए, तो उनके शिष्य बहुत डरे हुए और दुखी थे। वे छिपकर बैठे थे क्योंकि उन्हें डर था कि उन्हें भी पकड़ लिया जाएगा। पर एक आदमी था जिसने हिम्मत दिखाई — अरिमतिया का यूसुफ। वह एक अमीर आदमी था और यहूदी अगुवों में से एक था। पर वह चुपके से यीशु का चेला था क्योंकि उसे दूसरे अगुवों से डर लगता था। जब यीशु मर गए, तो यूसुफ ने फैसला किया कि अब वह चुप नहीं रहेगा। वह पिलातुस के पास गया और यीशु के शरीर को मांगा। यह बहुत बड़ी हिम्मत की बात थी क्योंकि इससे सब लोगों को पता चल जाता कि वह यीशु का चेला है। यूसुफ ने यीशु के शरीर को साफ कपड़े में लपेटा और अपनी नई कब्र में रखा। यह कब्र चट्टान में खोदी गई थी और कभी इस्तेमाल नहीं हुई थी। यूसुफ ने यीशु को सम्मान से दफनाया, जैसे एक राजा को दफनाया जाता है।
इस घटना से हम कई जरूरी बातें सीखते हैं। पहली बात — परमेश्वर मुश्किल हालात में भी अपने लोगों को तैयार करता है। यूसुफ एक अमीर आदमी था और उसके पास अपनी कब्र थी। यशायाह 53:9 में भविष्यवाणी थी कि मसीह को अमीर आदमी की कब्र में रखा जाएगा — और यह सच हुआ। दूसरी बात — सच्चा विश्वास कभी-कभी हमें मुश्किल फैसले लेने के लिए मजबूर करता है। यूसुफ को अपनी इज्जत और पद खोने का डर था, पर उसने यीशु के लिए खड़े होने का फैसला किया। तीसरी बात — जब सब कुछ खत्म लगता है, तब भी परमेश्वर की योजना चल रही होती है। शिष्यों को लगा कि सब कुछ खत्म हो गया, पर परमेश्वर जानता था कि तीन दिन बाद क्या होने वाला है। यीशु का दफनाया जाना जरूरी था ताकि उनका पुनरुत्थान साबित हो सके। अगर यीशु को दफनाया नहीं जाता, तो लोग कह सकते थे कि वे बेहोश थे, मरे नहीं थे। पर यीशु सच में मर गए थे और तीन दिन कब्र में रहे — और फिर जी उठे।
- यीशु का दफनाया जाना परमेश्वर की बड़ी योजना का जरूरी हिस्सा था।
- कब्र में रखा जाना दिखाता है कि यीशु सच में मर गए थे।
- यीशु ने हमारे पापों की सजा अपने ऊपर ली और हमें माफी दी।
- तीन दिन बाद जी उठना साबित करता है कि यीशु मौत पर जीत गए।
- यीशु की कब्र हमें सिखाती है कि परमेश्वर मुश्किलों को अच्छाई में बदल सकता है।
चिंतन के प्रश्न
- यीशु के दफनाए जाने से हमें परमेश्वर की योजना के बारे में क्या पता चलता है?
- जब तुम्हें लगे कि सब खत्म हो गया, तो तुम परमेश्वर पर कैसे भरोसा कर सकते हो?
- यीशु की कब्र और उनका जी उठना तुम्हारी मुश्किलों में तुम्हें कैसे हिम्मत देता है?
- क्या तुम किसी ऐसे समय को याद कर सकते हो जब परमेश्वर ने तुम्हारी मुश्किल को अच्छाई में बदल दिया?
- इस हफ्ते तुम किस एक मुश्किल में परमेश्वर पर भरोसा करने का फैसला करोगे?
- तुम किसी परेशान दोस्त को यीशु की कब्र की कहानी से कैसे हिम्मत दे सकते हो?
- यीशु के बलिदान को याद करके तुम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में क्या बदलाव लाओगे?
प्रार्थना के बिंदु
- हे प्रभु यीशु, धन्यवाद कि तुमने मेरे लिए अपनी जान दी और कब्र में गए। जब मुझे लगे कि सब खत्म हो गया, तब मुझे याद दिलाओ कि तुम्हारी योजना अभी भी चल रही है। मुझे विश्वास दो कि अंधेरे के बाद रोशनी जरूर आएगी।
- परमेश्वर, मेरी जिंदगी की मुश्किलों में मुझे हिम्मत दो। जब नौकरी, सेहत, या रिश्तों में परेशानी हो, तब मुझे तुम पर भरोसा करना सिखाओ। मुझे दिखाओ कि तुम मेरे लिए कुछ नया और अच्छा बनाने वाले हो।
- प्रभु, मेरे दोस्तों और परिवार को भी यह सच्चाई समझने में मदद करो। जो लोग परेशान हैं, उन्हें तुम्हारी शांति दो। मुझे उनकी मदद करने का मौका दो और उन्हें तुम्हारे प्रेम के बारे में बताने की हिम्मत दो। यीशु मसीह के नाम से, आमेन।
संबंधित वचन
- यशायाह 53:5-6
- रोमियों 6:3-5
- 1 कुरिन्थियों 15:3-4
- कुलुस्सियों 2:12
- 1 पतरस 2:24
- यूहन्ना 19:38-42
- मत्ती 28:5-6
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