bible-studyepistlesseeker

फिलिप्पियों 3: लक्ष्य की ओर दौड़ना

Disciplefy Team·16 अप्रैल 2026·5 मिनट पढ़ें

मसीह को जानने की अनुपम श्रेष्ठता — यह अध्ययन हमें दिखाता है कि यीशु को जानना सबसे बड़ा खजाना है। पौलुस ने अपनी सारी धार्मिक योग्यताओं को कूड़ा समझा ताकि वह मसीह को पा सके। वह हमें सिखाता है कि परमेश्वर के साथ सच्चा रिश्ता धार्मिक कामों से नहीं, बल्कि यीशु पर विश्वास से मिलता है। हम सीखेंगे कि कैसे पौलुस ने अपने पुराने जीवन को छोड़ा और मसीह के पीछे दौड़ा। यह अध्ययन हमें प्रोत्साहित करता है कि हम भी अपनी जिंदगी में यीशु को सबसे ऊपर रखें और उसके लिए जीएं।

ऐतिहासिक संदर्भ

पौलुस ने यह पत्र फिलिप्पी की कलीसिया को रोम की जेल से लगभग 61-62 ईस्वी में लिखा। वह झूठे शिक्षकों के खिलाफ चेतावनी देता है जो कहते थे कि मोक्ष के लिए यहूदी रीति-रिवाज जरूरी हैं। पौलुस खुद एक धर्मी फरीसी था, पर उसने सब कुछ छोड़ दिया ताकि मसीह को पा सके।

पवित्रशास्त्र का अंश

फिलिप्पियों 3:1-21

व्याख्या और अंतर्दृष्टि

फिलिप्पियों 3 में पौलुस अपनी पुरानी जिंदगी के बारे में बताता है। वह कहता है कि यहूदी धर्म में उसकी योग्यता बेदाग थी — आठवें दिन खतना हुआ, इस्राएल के वंश से, बिन्यामीन के गोत्र से, इब्रानियों का इब्रानी, व्यवस्था के पालन में फरीसी, उत्साह में कलीसिया को सताने वाला, और व्यवस्था की धार्मिकता में निर्दोष। पर फिर वह एक चौंकाने वाली बात कहता है — यह सब कुछ उसने हानि समझा, बल्कि कूड़ा गिना, ताकि मसीह को पा सके। यह शब्द 'कूड़ा' बहुत मजबूत है — इसका मतलब है गंदगी या कचरा जिसे फेंक दिया जाता है। पौलुस यह नहीं कह रहा कि ये चीजें बुरी थीं, बल्कि यह कि मसीह को जानने के मुकाबले इनकी कोई कीमत नहीं है। वह चाहता था कि उसकी अपनी धार्मिकता न हो जो व्यवस्था से आती है, बल्कि वह धार्मिकता हो जो मसीह पर विश्वास करने से मिलती है। यह सुसमाचार का दिल है — हम अपने कामों से नहीं, बल्कि यीशु पर भरोसा करने से बचाए जाते हैं। पौलुस यह भी कहता है कि वह मसीह को जानना चाहता है — उसके पुनरुत्थान की सामर्थ्य को और उसके दुखों की संगति को। यह सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि गहरा रिश्ता है।

इस अध्याय से हम तीन बड़े सिद्धांत सीखते हैं। पहला, मसीह को जानना सबसे बड़ा खजाना है — इस दुनिया की कोई भी चीज इसके बराबर नहीं। दूसरा, मोक्ष हमारे कामों से नहीं, बल्कि परमेश्वर के अनुग्रह से मिलता है जब हम यीशु पर विश्वास करते हैं। पौलुस स्पष्ट करता है कि व्यवस्था का पालन करना हमें परमेश्वर के सामने धर्मी नहीं बना सकता — केवल मसीह की धार्मिकता ही काफी है। तीसरा, मसीही जीवन एक दौड़ है जिसमें हम लगातार आगे बढ़ते हैं। पौलुस कहता है, 'मैं यह नहीं कहता कि मैं पा चुका हूं या सिद्ध हो गया हूं, पर मैं पकड़ने के लिए दौड़ता हूं।' वह हमें दिखाता है कि मसीही जीवन में हम कभी इतने परिपक्व नहीं होते कि हमें बढ़ने की जरूरत न रहे। हमें पीछे की चीजों को भूलकर आगे की ओर बढ़ना है। यह दौड़ का लक्ष्य क्या है? परमेश्वर की ऊपरी बुलाहट का पुरस्कार जो मसीह यीशु में है। यह पुरस्कार मसीह के साथ अनंत जीवन और उसकी महिमा में हिस्सा लेना है। पौलुस हमें प्रोत्साहित करता है कि हम भी इसी तरह सोचें और जीएं — मसीह को सबसे ऊपर रखें, अपने कामों पर भरोसा न करें, और हर दिन उसके पीछे चलते रहें।

चिंतन के प्रश्न

  1. आपकी जिंदगी में कौन सी चीजें यीशु से ज्यादा जगह ले रही हैं?
  2. पौलुस ने अपनी सारी योग्यताओं को कूड़ा क्यों कहा?
  3. यीशु को जानने का मतलब सिर्फ जानकारी होना है या रिश्ता बनाना?
  4. जब परेशानी आए, तो आप कैसे याद रख सकते हैं कि यीशु सबसे बड़ा खजाना है?
  5. आप इस हफ्ते किस एक चीज को छोड़ सकते हैं ताकि यीशु को पहली जगह दे सकें?
  6. क्या आप यीशु के लिए कुछ भी छोड़ने को तैयार हैं?
  7. आपके दोस्त और परिवार आपकी जिंदगी में यीशु की जगह कैसे देख सकते हैं?

प्रार्थना के बिंदु

संबंधित वचन


यह अध्ययन मार्गदर्शिका Disciplefy द्वारा तैयार की गई है। पूर्ण इंटरैक्टिव अनुभव के लिए ऐप डाउनलोड करें — अभ्यास मोड, ऑडियो और बहुत कुछ।

Disciplefy ऐप में अध्ययन करें

इंटरेक्टिव अध्ययन गाइड, फॉलो-अप चैट, अभ्यास मोड और ऑडियो — English, हिन्दी और मलयालम में।

ऐप डाउनलोड करें — मुफ्त →