कुरिन्थियों: मसीह और उसकी कलीसिया

1 कुरिन्थियों 1: कलीसिया में फूट

Disciplefy Team·10 अक्टू॰ 2026·7 मिनट पढ़ें

कलीसिया में फूट का खतरा और मसीह में एकता। पौलुस कुरिन्थुस की कलीसिया को लिखता है जहाँ विश्वासी अलग-अलग गुटों में बँट गए थे — कोई पौलुस का, कोई अपुल्लोस का, कोई कैफा का। प्रेरित उन्हें याद दिलाता है कि मसीह बँटा हुआ नहीं है और सब को एक मन और एक विचार में रहना चाहिए। यह अध्ययन दिखाता है कि परमेश्वर की बुद्धि मनुष्यों के ज्ञान से कितनी अलग है — क्रूस की मूर्खता दुनिया के ज्ञान से बढ़कर है। हम सीखेंगे कि कलीसिया में एकता कैसे बनाए रखें और अपना घमंड सिर्फ प्रभु में करें, न कि किसी इंसानी अगुवे में।

ऐतिहासिक संदर्भ

पौलुस ने यह पत्र लगभग 55 ईस्वी में इफिसुस से लिखा। कुरिन्थुस एक बड़ा व्यापारिक शहर था जहाँ यूनानी ज्ञान और दर्शन की बहुत कद्र थी। कलीसिया में नए विश्वासी थे जो अपनी पुरानी सोच से जूझ रहे थे। खलोए के घराने से पौलुस को खबर मिली कि कलीसिया में झगड़े और गुटबाजी हो रही है। यह पत्र इन समस्याओं को सुलझाने और मसीह में सच्ची एकता सिखाने के लिए लिखा गया।

पवित्रशास्त्र का अंश

1 कुरिन्थियों 1:10-31

व्याख्या और अंतर्दृष्टि

कलीसिया में फूट की समस्या और मसीह में एकता की विनती

पौलुस अपने पत्र की शुरुआत में ही सबसे बड़ी समस्या को छूता है — कलीसिया में फूट। वह कहता है, "हे भाइयो, मैं तुम से हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से विनती करता हूँ कि तुम सब एक ही बात कहो, और तुम में फूट न हो" (1 कुरिन्थियों 1:10)। यह सिर्फ एक सुझाव नहीं है बल्कि प्रभु के नाम से एक गंभीर विनती है। खलोए के घराने से पौलुस को खबर मिली थी कि विश्वासी अलग-अलग गुटों में बँट गए हैं — कुछ कहते थे "मैं पौलुस का हूँ", कुछ "मैं अपुल्लोस का", कुछ "मैं कैफा का", और कुछ "मैं मसीह का" (1 कुरिन्थियों 1:12)। यह विभाजन किसी सिद्धांत के मुद्दे पर नहीं था बल्कि इंसानी अगुवों के प्रति वफादारी पर था। पौलुस तीखा सवाल पूछता है: "क्या मसीह बँटा हुआ है? क्या पौलुस तुम्हारे लिए क्रूस पर चढ़ाया गया?" (1 कुरिन्थियों 1:13)। यह सवाल दिखाता है कि जब हम किसी इंसान को केंद्र बनाते हैं तो हम मसीह की एकता को तोड़ देते हैं। पौलुस याद दिलाता है कि उसने बहुत कम लोगों को बपतिस्मा दिया ताकि कोई यह न कहे कि उन्हें पौलुस के नाम पर बपतिस्मा मिला (1 कुरिन्थियों 1:14-16)। उसका असली काम सुसमाचार सुनाना था, न कि अपने चेले बनाना।

Disciplefyकिसी भी अंश का गहरा अध्ययन करें
इस अंश को लेकर कोई सवाल है? कुछ ही सेकंड में पूरी स्टडी गाइड पाएं, फिर जब तक बात समझ न आए, सवाल पूछते रहें। मुफ़्त।मुफ़्त गाइड खोलें

परमेश्वर की बुद्धि बनाम मनुष्यों का ज्ञान

पौलुस आगे बताता है कि कुरिन्थुस की समस्या की जड़ में दुनिया का ज्ञान था। यूनानी लोग बुद्धि और दर्शन को बहुत महत्व देते थे, और कलीसिया में भी यही सोच घुस गई थी। लेकिन परमेश्वर की बुद्धि बिल्कुल अलग है — "क्योंकि क्रूस की कथा नाश होनेवालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पानेवालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है" (1 कुरिन्थियों 1:18)। दुनिया की नजर में क्रूस पर मरना कमजोरी और मूर्खता है, लेकिन यही परमेश्वर की सबसे बड़ी बुद्धि और शक्ति है। परमेश्वर ने दुनिया के ज्ञान को मूर्ख ठहराया है (1 कुरिन्थियों 1:20)। यहूदी चिन्ह चाहते थे और यूनानी ज्ञान की खोज में थे, "परन्तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं" (1 कुरिन्थियों 1:23)। यह संदेश यहूदियों के लिए ठोकर का कारण और अन्यजातियों के लिए मूर्खता है, लेकिन बुलाए हुओं के लिए — चाहे यहूदी हों या यूनानी — मसीह परमेश्वर की सामर्थ और परमेश्वर की बुद्धि है। पौलुस स्पष्ट करता है: "परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों की बुद्धि से बुद्धिमान है, और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों की शक्ति से अधिक बलवान है" (1 कुरिन्थियों 1:25)। परमेश्वर ने जानबूझकर दुनिया की नजर में मूर्ख, निर्बल, और तुच्छ लोगों को चुना ताकि कोई उसके सामने घमंड न करे (1 कुरिन्थियों 1:26-29)। हम मसीह में हैं क्योंकि परमेश्वर ने हमें चुना, और मसीह ही हमारी बुद्धि, धार्मिकता, पवित्रता और छुटकारा बन गया है (1 कुरिन्थियों 1:30)। इसलिए "जो घमण्ड करे वह प्रभु में घमण्ड करे" (1 कुरिन्थियों 1:31)।

अपनी कलीसिया में एकता लाना

तुम्हारी कलीसिया में क्या तुम देखते हो कि लोग अलग-अलग गुटों में बँटे हैं? शायद कुछ लोग एक पास्टर को ज्यादा पसंद करते हैं, कुछ दूसरे को। या फिर कुछ लोग अमीर हैं और कुछ गरीब, और दोनों अलग-अलग बैठते हैं। पौलुस की यह चिट्ठी तुम्हें याद दिलाती है कि यह गलत है। इस हफ्ते, जब तुम कलीसिया जाओ, तो किसी ऐसे व्यक्ति से बात करो जिससे तुम आम तौर पर बात नहीं करते। अगर तुम युवा हो, तो किसी बुजुर्ग से बात करो। अगर तुम अमीर हो, तो किसी गरीब भाई-बहन के साथ बैठो। जब तुम किसी के बारे में बुरा सोचने लगो, तो खुद से पूछो: "क्या मैं मसीह के क्रूस को भूल रहा हूँ?" क्रूस हमें सिखाता है कि हम सब बराबर हैं — सब पापी, सब को माफी की जरूरत है। अगर तुम्हारी कलीसिया में झगड़ा है, तो शांति बनाने वाले बनो, न कि गुटबाजी करने वाले।

इस हफ्ते के ठोस कदम

सोमवार को, अपनी कलीसिया के उन पाँच लोगों की लिस्ट बनाओ जिनसे तुम्हारा मतभेद है या जिन्हें तुम नापसंद करते हो। फिर हर दिन उनमें से एक के लिए नाम लेकर प्रार्थना करो। बुधवार को, उनमें से किसी एक को फोन करो या मिलो, और उनसे पूछो कि वे कैसे हैं। शुक्रवार को, अपने परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर बात करो: "हम कैसे एक-दूसरे से ज्यादा प्रेम कर सकते हैं?" जब तुम्हें गुस्सा आए या किसी से झगड़ा हो, तो 1 कुरिन्थियों 1:10 को याद करो और खुद से पूछो: "क्या मैं मसीह की देह को तोड़ रहा हूँ?" अगले रविवार को, कलीसिया में किसी नए व्यक्ति का स्वागत करो और उसे अपने साथ बिठाओ। याद रखो, एकता बनाना तुम्हारी जिम्मेदारी है, न कि सिर्फ पास्टर की।

चिंतन के प्रश्न

  1. क्या मैं अपनी कलीसिया में किसी खास गुट या समूह का हिस्सा बन गया हूँ?
  2. मैं किन लोगों से बचता हूँ या जिन्हें नापसंद करता हूँ, और क्यों?
  3. क्या मैं अपने पसंदीदा प्रचारक या नेता को मसीह से ज्यादा महत्व देता हूँ?
  4. मैं इस हफ्ते अपनी कलीसिया में एकता लाने के लिए क्या एक काम कर सकता हूँ?
  5. जब मुझे किसी विश्वासी से मतभेद हो, तो मैं कैसे प्रतिक्रिया देता हूँ?
  6. क्या मैं क्रूस को केंद्र में रखकर दूसरों को देखता हूँ, या अपनी पसंद-नापसंद से?
  7. मेरी कलीसिया में कौन अकेला या अलग-थलग महसूस कर रहा है, और मैं उनकी कैसे मदद कर सकता हूँ?

प्रार्थना के बिंदु

हे प्रभु यीशु, मैं तुम्हारे सामने आता हूँ और मानता हूँ कि कई बार मैंने तुम्हारी कलीसिया में फूट डाली है। मैंने अपनी पसंद के लोगों को चुना और दूसरों को नजरअंदाज किया। मैंने अपने पसंदीदा नेता को तुमसे ज्यादा महत्व दिया। प्रभु, मुझे माफ करो। मुझे याद दिलाओ कि तुम्हारा क्रूस ही हमारी एकता का आधार है, न कि हमारी पसंद या नापसंद। मेरे दिल को बदलो ताकि मैं हर विश्वासी को तुम्हारी नजर से देख सकूँ। मुझे वह प्रेम दो जो गुटबाजी को तोड़ता है और एकता बनाता है। इस हफ्ते मुझे साहस दो कि मैं उन लोगों के पास जाऊँ जिनसे मैं बचता हूँ, और उनके लिए प्रार्थना करूँ। हमारी कलीसिया को एक करो, प्रभु, ताकि दुनिया देखे कि तुम सच में हमारे बीच हो। यीशु मसीह के नाम से, आमेन।

संबंधित वचन

  • यूहन्ना 17:20-23
  • इफिसियों 4:1-6
  • फिलिप्पियों 2:1-4
  • रोमियों 12:4-5
  • कुलुस्सियों 3:12-14
  • 1 पतरस 3:8-9
  • भजन संहिता 133:1
साझा करें

Disciplefy ऐप में अध्ययन करें

इंटरेक्टिव अध्ययन गाइड, फॉलो-अप चैट, अभ्यास मोड और ऑडियो — English, हिन्दी और मलयालम में।

ऐप डाउनलोड करें — मुफ्त →

संबंधित लेख