कुरिन्थियों: मसीह और उसकी कलीसिया

1 कुरिन्थियों 3: मसीह के सेवक

Disciplefy Team·12 अक्टू॰ 2026·7 मिनट पढ़ें

मसीह के सेवक: परमेश्वर की खेती में काम करना। पौलुस कुरिन्थुस की कलीसिया को सिखाता है कि सेवक केवल औजार हैं — असली काम परमेश्वर करता है। एक ने बीज बोया, दूसरे ने पानी दिया, पर बढ़ाने वाला परमेश्वर है। हम सब परमेश्वर की खेती और उसकी इमारत हैं, और नींव यीशु मसीह है। यह अध्ययन सिखाता है कि कलीसिया में सेवकाई कैसे करें — घमंड छोड़कर, एकता में, परमेश्वर की महिमा के लिए। तुम सीखोगे कि हर विश्वासी परमेश्वर का मंदिर है और हमें पवित्रता में जीना है।

ऐतिहासिक संदर्भ

पौलुस ने कुरिन्थुस की कलीसिया को लगभग 55 ईस्वी में यह पत्र लिखा। कलीसिया में गुट बन गए थे — कुछ कहते थे 'हम पौलुस के हैं', कुछ 'अपुल्लोस के'। लोग सेवकों को ज्यादा महत्व दे रहे थे और परमेश्वर को भूल रहे थे। पौलुस इस अध्याय में समझाता है कि सेवक क्या हैं और कलीसिया किसकी है।

पवित्रशास्त्र का अंश

1 कुरिन्थियों 3:1-23

व्याख्या और अंतर्दृष्टि

परमेश्वर का काम, मनुष्य के औजार

पौलुस शुरू करता है एक सच्चाई से — कुरिन्थुस के विश्वासी अभी भी आत्मिक बच्चे हैं (1 कुरिन्थियों 3:1-3)। वे ईर्ष्या और झगड़े कर रहे हैं, जैसे संसार के लोग करते हैं। जब कोई कहता है 'मैं पौलुस का हूं' या 'मैं अपुल्लोस का हूं', तो वे दिखाते हैं कि वे अभी भी शारीरिक सोच में जी रहे हैं। पौलुस फिर पूछता है — 'अपुल्लोस क्या है? पौलुस क्या है?' (1 कुरिन्थियों 3:5)। जवाब सीधा है — हम केवल सेवक हैं, जिनके द्वारा तुम विश्वास में आए। पौलुस ने रोपा (बीज बोया), अपुल्लोस ने सींचा (पानी दिया), पर बढ़ाने वाला परमेश्वर था (1 कुरिन्थियों 3:6)। यह तस्वीर बहुत साफ है — किसान खेत में काम करता है, पर फसल उगाना परमेश्वर का काम है। इसलिए न रोपने वाला कुछ है, न सींचने वाला, बल्कि परमेश्वर जो बढ़ाता है (1 कुरिन्थियों 3:7)। रोपने वाला और सींचने वाला एक हैं — दोनों एक ही मकसद के लिए काम करते हैं, और हर एक को अपनी मेहनत के अनुसार मजदूरी मिलेगी (1 कुरिन्थियों 3:8)। यह सिखाता है कि कलीसिया में सेवा करने वाले आपस में प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साथी मजदूर हैं। हम परमेश्वर के साथ काम करने वाले हैं, और तुम परमेश्वर की खेती हो, परमेश्वर की इमारत हो (1 कुरिन्थियों 3:9)।

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मसीह — एकमात्र नींव

पौलुस अब तस्वीर बदलता है — खेत से इमारत की ओर। परमेश्वर ने उसे अनुग्रह दिया कि वह एक बुद्धिमान राजमिस्त्री की तरह नींव रखे, और दूसरे उस पर इमारत बनाएं (1 कुरिन्थियों 3:10)। पर हर एक को सावधान रहना है कि वह कैसे बनाता है। क्योंकि कोई दूसरी नींव नहीं रख सकता सिवाय उस नींव के जो पड़ी है, यानी यीशु मसीह (1 कुरिन्थियों 3:11)। यह बात बहुत गहरी है — कलीसिया की नींव मसीह है, न कि कोई इंसान, न कोई परंपरा, न कोई फलसफा। अब सवाल है — इस नींव पर क्या बनाया जा रहा है? कोई सोना, चांदी, कीमती पत्थर लगाता है; कोई लकड़ी, घास, फूस (1 कुरिन्थियों 3:12)। हर एक का काम प्रकट होगा, क्योंकि वह दिन उसे आग से जांचेगा (1 कुरिन्थियों 3:13)। जिसका काम टिकेगा, उसे मजदूरी मिलेगी; जिसका काम जल जाएगा, उसे नुकसान होगा, पर वह खुद बच जाएगा — जैसे आग में से (1 कुरिन्थियों 3:14-15)। यह न्याय के दिन की बात है जब मसीह हर सेवक के काम को परखेगा। पौलुस फिर याद दिलाता है — क्या तुम नहीं जानते कि तुम परमेश्वर का मंदिर हो और परमेश्वर का आत्मा तुम में रहता है? (1 कुरिन्थियों 3:16)। यह सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक सच्चाई है — पूरी कलीसिया परमेश्वर का मंदिर है। इसलिए जो परमेश्वर के मंदिर को नाश करेगा, परमेश्वर उसे नाश करेगा (1 कुरिन्थियों 3:17)। अंत में पौलुस चेतावनी देता है — अपने आप को धोखा मत दो; अगर कोई अपने को बुद्धिमान समझता है, तो मूर्ख बने ताकि बुद्धिमान हो जाए (1 कुरिन्थियों 3:18)। संसार की बुद्धि परमेश्वर के सामने मूर्खता है (1 कुरिन्थियों 3:19)। इसलिए किसी मनुष्य पर घमंड मत करो, क्योंकि सब कुछ तुम्हारा है — पौलुस हो या अपुल्लोस या कैफा, संसार हो या जीवन या मृत्यु, वर्तमान हो या भविष्य — सब तुम्हारा है, और तुम मसीह के हो, और मसीह परमेश्वर का है (1 कुरिन्थियों 3:21-23)।

तुम्हारी सेवा में परमेश्वर का काम देखना

जब तुम कलीसिया में या अपने घर में सेवा करते हो, तो यह सच्चाई तुम्हारी नज़र बदल देती है। अगर तुम बच्चों को बाइबल सिखाते हो और लगता है कि कोई फर्क नहीं पड़ रहा, याद रखो — तुम सिर्फ बीज बो रहे हो, बढ़ाने वाला परमेश्वर है। जब तुम किसी बीमार की देखभाल करते हो या किसी को खाना खिलाते हो, तुम परमेश्वर के हाथ हो, पर असली काम वही कर रहा है। यह सोच तुम्हें घमंड से बचाती है जब काम अच्छा चलता है, और निराशा से बचाती है जब नतीजे नहीं दिखते। तुम्हारा काम है वफादारी से बोना और पानी देना — फसल परमेश्वर की ज़िम्मेदारी है। इस हफ्ते जब तुम सेवा करो, अपने आप से पूछो: "क्या मैं नतीजों पर भरोसा कर रहा हूं या परमेश्वर पर?" अगर तुम थक गए हो क्योंकि लोग नहीं बदल रहे, तो यह बोझ परमेश्वर को दे दो — वही दिलों को बदलता है, तुम नहीं।

इस हफ्ते के ठोस कदम

सोमवार से शुक्रवार तक, हर सुबह प्रार्थना में परमेश्वर से कहो: "प्रभु, आज मुझे अपने औजार की तरह इस्तेमाल करो, और नतीजे तुम्हारे हाथ में हैं।" इस हफ्ते एक व्यक्ति को चुनो जिसे तुम परमेश्वर के बारे में बता सकते हो — हो सकता है पड़ोसी, सहकर्मी, या रिश्तेदार — और उनके लिए रोज़ प्रार्थना करो, फिर एक बार उनसे यीशु के बारे में बात करो (छोटी बात भी चलेगी, जैसे "परमेश्वर ने मेरी मदद की")। अगर तुम कलीसिया में सेवा करते हो, तो इस हफ्ते एक काम करो बिना किसी को बताए — चुपचाप कुर्सियां लगाओ, किसी की मदद करो, या सफाई करो — सिर्फ परमेश्वर के लिए, तारीफ के लिए नहीं। जब तुम्हें लगे कि तुम्हारी मेहनत बेकार जा रही है, 1 कुरिन्थियों 3:6-7 खोलो और ज़ोर से पढ़ो: "मैंने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, पर परमेश्वर ने बढ़ाया।" यह तुम्हें याद दिलाएगा कि असली काम परमेश्वर का है। शनिवार को अपनी डायरी में लिखो: इस हफ्ते मैंने कहां बोया, कहां पानी दिया, और मैं परमेश्वर पर कैसे भरोसा कर रहा हूं कि वह बढ़ाएगा।

चिंतन के प्रश्न

  1. क्या मैं अपनी सेवा में नतीजों पर ज़्यादा ध्यान देता हूं या वफादारी पर?
  2. मैं कब घमंडी हो जाता हूं जब सेवा में अच्छे नतीजे आते हैं?
  3. किस सेवा में मैं निराश हूं क्योंकि फल नहीं दिख रहा?
  4. मैं इस हफ्ते किस एक व्यक्ति के लिए 'बीज बो' सकता हूं?
  5. क्या मैं परमेश्वर को अपनी सेवा का मालिक मानता हूं या खुद को?
  6. मैं चुपचाप, बिना तारीफ के, कौन सा काम कर सकता हूं?
  7. मैं कैसे याद रख सकता हूं कि असली काम परमेश्वर करता है, मैं नहीं?

प्रार्थना के बिंदु

हे प्रभु परमेश्वर, मैं तुम्हारे सामने आता हूं और मानता हूं कि मैं सिर्फ तुम्हारा औजार हूं। मुझे माफ करो जब मैं सोचता हूं कि सेवा में कामयाबी मेरी मेहनत से आती है, या जब मैं निराश हो जाता हूं क्योंकि नतीजे नहीं दिखते। प्रभु, मुझे सिखाओ कि मेरा काम सिर्फ वफादारी से बोना और पानी देना है — बढ़ाना तुम्हारा काम है। इस हफ्ते मुझे वह व्यक्ति दिखाओ जिसके लिए मैं बीज बो सकता हूं, और मुझे हिम्मत दो कि मैं तुम्हारे बारे में बात करूं। जब मैं थक जाऊं या निराश हो जाऊं, मुझे याद दिलाओ कि तुम काम कर रहे हो, भले ही मैं न देख पाऊं। मुझे घमंड से बचाओ जब काम अच्छा चलता है, और मुझे निराशा से बचाओ जब फल नहीं दिखता। प्रभु, मेरी सेवा को तुम्हारी महिमा के लिए इस्तेमाल करो, और मुझे सिखाओ कि मैं तुम्हारे हाथ में एक छोटा सा औजार हूं। यीशु मसीह के नाम से, आमेन।

संबंधित वचन

  • यूहन्ना 15:5
  • 2 कुरिन्थियों 3:5-6
  • फिलिप्पियों 2:13
  • कुलुस्सियों 1:29
  • इफिसियों 2:10
  • 1 थिस्सलुनीकियों 5:24
  • भजन संहिता 127:1
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