मत्ती का सुसमाचार

मत्ती 10: बारहों को भेजना

Disciplefy Team·11 जून 2026·7 मिनट पढ़ें

बारहों को भेजना — यीशु का मिशन और हमारी बुलाहट। इस अध्याय में यीशु अपने बारह चेलों को चुनते हैं और उन्हें राज्य का संदेश फैलाने के लिए भेजते हैं। वह उन्हें अधिकार देते हैं, लेकिन साथ ही चेतावनी भी देते हैं कि रास्ता आसान नहीं होगा — सताव आएगा, लोग उन्हें ठुकराएंगे। फिर भी यीशु उन्हें हिम्मत देते हैं: परमेश्वर हर गौरैया की परवाह करता है, तो तुम्हारी कितनी ज्यादा करेगा! यह अध्ययन हमें सिखाता है कि मसीह की सेवा में जाना डर के बिना, पूरे भरोसे के साथ होना चाहिए। हम सीखेंगे कि यीशु के पीछे चलने का मतलब है उन्हें हर रिश्ते से ऊपर रखना, और यह कि परमेश्वर हमें कभी अकेला नहीं छोड़ता।

ऐतिहासिक संदर्भ

मत्ती 10 यीशु की सेवकाई के बीच का समय है। उन्होंने पहले ही राज्य का प्रचार शुरू कर दिया था और अब वह अपने काम को बढ़ाने के लिए बारह चेलों को तैयार करते हैं। यह अध्याय तीन भागों में है: चेलों की नियुक्ति और अधिकार (1-4), उनके मिशन के निर्देश (5-15), और आने वाले सताव की चेतावनी के साथ प्रोत्साहन (16-42)। यीशु अपने चेलों को वास्तविकता के लिए तैयार करते हैं — सेवा में कीमत चुकानी पड़ती है।

पवित्रशास्त्र का अंश

मत्ती 10:1-42

व्याख्या और अंतर्दृष्टि

यीशु अपने चेलों को अधिकार और मिशन देते हैं

मत्ती 10 की शुरुआत में यीशु बारह चेलों को बुलाते हैं और उन्हें "अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार" देते हैं (मत्ती 10:1)। यह कोई छोटी बात नहीं थी — यीशु अपनी ही शक्ति इन साधारण मछुआरों, कर वसूलने वालों और आम लोगों को दे रहे थे। वह उन्हें बीमारों को चंगा करने, मुर्दों को जिलाने, और राज्य का संदेश देने के लिए भेजते हैं (मत्ती 10:7-8)। लेकिन ध्यान दो — यीशु उन्हें पहले "इस्राएल के घराने की खोई हुई भेड़ों" के पास भेजते हैं (मत्ती 10:6)। यह इसलिए क्योंकि परमेश्वर की योजना में पहले इस्राएल को मसीहा का संदेश मिलना था, फिर सारी दुनिया को (रोमियों 1:16)। यीशु उन्हें सिखाते हैं कि सेवा में सादगी ज़रूरी है — न ज्यादा पैसा, न ज्यादा सामान, बस परमेश्वर पर भरोसा (मत्ती 10:9-10)। यह हमें दिखाता है कि परमेश्वर का काम करने के लिए हमें दुनिया के तरीकों की ज़रूरत नहीं, बल्कि उसकी शक्ति और भरोसे की ज़रूरत है। जब हम परमेश्वर की बुलाहट पर चलते हैं, तो वह हमारी ज़रूरतों को पूरा करता है — यह उसका वादा है (फिलिप्पियों 4:19)।

सताव की चेतावनी और परमेश्वर की देखभाल का भरोसा

यीशु अपने चेलों को धोखा नहीं देते — वह साफ-साफ कहते हैं कि रास्ता कठिन होगा। "मैं तुम्हें भेड़ों की तरह भेड़ियों के बीच भेज रहा हूं" (मत्ती 10:16)। लोग उन्हें अदालतों में घसीटेंगे, कोड़े मारेंगे, यहां तक कि परिवार के लोग भी उनके खिलाफ हो जाएंगे (मत्ती 10:17, 21)। लेकिन इसी डर के बीच यीशु तीन बार कहते हैं: "मत डरो" (मत्ती 10:26, 28, 31)। क्यों? क्योंकि परमेश्वर हर छोटी चीज़ की परवाह करता है — यहां तक कि एक गौरैया की भी, जो बाज़ार में सबसे सस्ती चीज़ थी (मत्ती 10:29)। यीशु कहते हैं, "तुम्हारे सिर के सारे बाल गिने हुए हैं" (मत्ती 10:30) — यानी परमेश्वर तुम्हारी हर छोटी से छोटी बात जानता है। यह हमें सिखाता है कि मसीह के पीछे चलने में कीमत है, लेकिन परमेश्वर का प्रेम और देखभाल उससे कहीं बड़ी है। यीशु यह भी कहते हैं कि जो उन्हें लोगों के सामने मानेगा, वह उसे स्वर्ग में पिता के सामने मानेगा (मत्ती 10:32)। यह हमारी पहचान की बात है — क्या हम यीशु को अपना प्रभु मानते हैं, चाहे कुछ भी हो? यीशु कहते हैं कि उनके पीछे चलने का मतलब है अपना क्रूस उठाना (मत्ती 10:38) — यानी अपनी इच्छाओं को मारकर उनकी इच्छा को जीना। जो अपनी जान बचाने की कोशिश करेगा वह उसे खो देगा, लेकिन जो यीशु के लिए अपनी जान देगा वह असली जिंदगी पाएगा (मत्ती 10:39)। यह सुसमाचार का दिल है — हम अपने लिए नहीं, मसीह के लिए जीते हैं (गलातियों 2:20)।

अपनी जिंदगी में यीशु की बुलाहट को जीना

यीशु ने अपने चेलों को भेजा, और आज वह तुम्हें भी बुला रहे हैं। तुम्हें किसी बड़े मंच पर खड़े होने की ज़रूरत नहीं — तुम्हारा घर, तुम्हारा ऑफिस, तुम्हारा मोहल्ला ही तुम्हारा मिशन फील्ड है। जब तुम्हारा पड़ोसी परेशानी में हो, तो उसकी मदद करो और बताओ कि परमेश्वर का प्रेम असली है। जब तुम्हारे ऑफिस में कोई निराश हो, तो उसे उम्मीद के शब्द दो। अपने परिवार में शांति और माफी का माहौल बनाओ — यह भी गवाही है। यीशु ने कहा था कि उनके चेले दुनिया की रोशनी हैं, और तुम भी वही रोशनी हो सकते हो जहां तुम हो। तुम्हारा छोटा सा काम — किसी के लिए प्रार्थना करना, किसी को माफ करना, सच बोलना — यह सब परमेश्वर के राज्य को फैलाने का तरीका है। डरो मत कि तुम काफी नहीं हो; यीशु ने साधारण मछुआरों को चुना था, और उन्होंने दुनिया बदल दी।

इस हफ्ते के लिए ठोस कदम

इस हफ्ते तीन काम करो जो तुम्हारी बुलाहट को जीवंत बनाएं। पहला, हर सुबह 10 मिनट प्रार्थना में बिताओ और परमेश्वर से पूछो, 'आज मैं किसकी मदद कर सकता हूं?' दूसरा, किसी एक व्यक्ति को फोन करो या मिलो जिससे तुमने बहुत दिनों से बात नहीं की, और उसे बताओ कि परमेश्वर ने तुम्हारी जिंदगी में क्या किया है — कोई बड़ी कहानी नहीं, बस सच्चाई से। तीसरा, जब कोई तुम्हें परेशान करे या गलत बोले, तो गुस्सा करने की जगह प्रार्थना करो और प्रेम से जवाब दो। यह आसान नहीं होगा, लेकिन यही असली गवाही है। परमेश्वर के साथ अपना रिश्ता गहरा करने के लिए रोज़ बाइबल पढ़ो — शुरुआत मत्ती 5-7 से करो, जहां यीशु सिखाते हैं कि उनके चेले कैसे जीएं। जब मुश्किल आए, तो याद करो कि यीशु ने कहा था, 'मैं तुम्हारे साथ हूं।' तुम अकेले नहीं हो — पवित्र आत्मा तुम्हें ताकत देगा, और परमेश्वर तुम्हारे छोटे कदमों को भी बड़े काम में बदल सकता है।

  • यीशु का अधिकार उनके चेलों में बांटा गया — वह हमें भी ताकत देते हैं।
  • मिशन सिर्फ पादरियों का नहीं, बल्कि हर विश्वासी का है जो यीशु को जानता है।
  • विरोध और मुश्किलें आएंगी, लेकिन परमेश्वर की मौजूदगी हमेशा साथ रहेगी।
  • छोटे काम भी परमेश्वर के राज्य को फैलाने का ज़रिया बन सकते हैं।

चिंतन के प्रश्न

  1. यीशु ने बारह चेलों को क्यों चुना और उन्हें भेजने से पहले क्या अधिकार दिया?
  2. क्या तुम अपनी जिंदगी में परमेश्वर की बुलाहट को महसूस करते हो? वह तुम्हें कहां भेज रहे हैं?
  3. जब यीशु ने चेलों को चेतावनी दी कि विरोध आएगा, तो इसका मतलब आज तुम्हारे लिए क्या है?
  4. तुम अपने घर, ऑफिस या मोहल्ले में किस एक व्यक्ति को यीशु के प्रेम के बारे में बता सकते हो?
  5. क्या तुम डरते हो कि तुम काफी नहीं हो? परमेश्वर ने साधारण लोगों को कैसे इस्तेमाल किया है?
  6. इस हफ्ते तुम कौन सा एक ठोस कदम उठाओगे जो तुम्हारी गवाही को मजबूत बनाए?
  7. जब मुश्किल आए, तो तुम कैसे याद रखोगे कि यीशु तुम्हारे साथ हैं?

प्रार्थना के बिंदु

हे प्रभु यीशु, तुम्हारा शुक्र है कि तुमने हमें भी बुलाया है, जैसे तुमने अपने बारह चेलों को बुलाया था। हम साधारण लोग हैं, लेकिन तुम हमें अपने राज्य के काम के लिए इस्तेमाल करना चाहते हो। हमें अपनी पवित्र आत्मा से भर दो ताकि हम डर के बिना तुम्हारे बारे में बता सकें। हमारे घर, ऑफिस और मोहल्ले में हमें मौके दो कि हम तुम्हारे प्रेम को दिखा सकें। जब विरोध आए या लोग हमें समझ न पाएं, तो हमें हिम्मत दो कि हम तुम पर भरोसा रखें। हमें सिखाओ कि हम छोटे-छोटे कामों में भी वफादार रहें, क्योंकि तुम छोटी चीज़ों को भी बड़ा बना सकते हो। इस हफ्ते हमें किसी एक व्यक्ति के पास भेजो जिसे तुम्हारी ज़रूरत है, और हमारे मुंह में सही शब्द डाल दो। हम जानते हैं कि तुम हमारे साथ हो, और यही हमारी ताकत है। यीशु मसीह के नाम से, आमेन।

संबंधित वचन

  • मत्ती 28:18-20
  • प्रेरितों के काम 1:8
  • यूहन्ना 20:21
  • 2 तिमुथियुस 1:7-8
  • 1 पतरस 3:15
  • रोमियों 10:14-15
  • इफिसियों 2:10
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