मत्ती का सुसमाचार

मत्ती 9: क्षमा करने और पापियों को बुलाने का अधिकार

Disciplefy Team·11 जून 2026·8 मिनट पढ़ें

यीशु का अधिकार पापों को माफ करने और पापियों को बुलाने का। मत्ती 9 में यीशु एक लकवे के मारे हुए आदमी के पापों को माफ करते हैं, और फिर उसे चंगा करके दिखाते हैं कि उनके पास परमेश्वर का अधिकार है। वह मत्ती नाम के चुंगी लेने वाले को बुलाते हैं और पापियों के साथ खाना खाते हैं, यह बताते हुए कि वह धर्मी लोगों के लिए नहीं बल्कि पापियों को पश्चाताप के लिए बुलाने आए हैं। यह अध्याय हमें सिखाता है कि यीशु के पास पापों को माफ करने का पूरा अधिकार है और वह हर तरह के पापी को अपने पास बुलाते हैं। हम सीखते हैं कि कोई भी व्यक्ति यीशु की माफी और बुलाहट से बाहर नहीं है, चाहे उसका अतीत कैसा भी हो।

ऐतिहासिक संदर्भ

मत्ती का सुसमाचार यीशु को इस्राएल के प्रतिज्ञात राजा के रूप में पेश करता है। अध्याय 9 में यीशु की सेवकाई बढ़ रही है और वह अपने अधिकार को चमत्कारों और शिक्षा के द्वारा दिखा रहे हैं। धार्मिक अगुवे उनका विरोध करना शुरू कर रहे हैं क्योंकि यीशु पापियों और समाज से बाहर किए गए लोगों के साथ समय बिताते हैं।

पवित्रशास्त्र का अंश

मत्ती 9:1-13

व्याख्या और अंतर्दृष्टि

पापों को माफ करने का दिव्य अधिकार

जब यीशु लकवे के मारे हुए आदमी को देखते हैं, तो वह पहले उसके पापों को माफ करते हैं, न कि उसे चंगा करते हैं। यह बात बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यीशु जानते थे कि इंसान की सबसे बड़ी जरूरत शारीरिक चंगाई नहीं, बल्कि पापों की माफी है। जब धर्मशास्त्री सोचते हैं कि यीशु निंदा कर रहे हैं, तो वह सही थे कि केवल परमेश्वर ही पापों को माफ कर सकता है। लेकिन वह यह नहीं समझ पाए कि यीशु स्वयं परमेश्वर हैं। यीशु उनके मन की बातें जानते थे, जो उनकी दिव्यता का एक और सबूत है। फिर यीशु एक सवाल पूछते हैं: क्या आसान है - पापों को माफ करना या चंगा करना? दोनों ही असंभव हैं इंसान के लिए, लेकिन यीशु दोनों कर सकते हैं। वह लकवे के मारे को चंगा करके दिखाते हैं कि उनके पास पापों को माफ करने का भी अधिकार है। यह चमत्कार केवल दया का काम नहीं था, बल्कि यीशु की पहचान का सबूत था कि वह मनुष्य के पुत्र हैं जिनके पास स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार है। भीड़ ने परमेश्वर की महिमा की क्योंकि उन्होंने देखा कि परमेश्वर ने मनुष्यों को ऐसा अधिकार दिया है, लेकिन असली बात यह थी कि यीशु स्वयं परमेश्वर हैं जो मनुष्य बनकर आए हैं।

पापियों को बुलाने का मिशन

यीशु मत्ती को बुलाते हैं, जो एक चुंगी लेने वाला था और यहूदी समाज में सबसे ज्यादा नफरत किए जाने वाले लोगों में से एक था। चुंगी लेने वाले रोमी सरकार के लिए काम करते थे और अपने ही लोगों से ज्यादा पैसे वसूलते थे, इसलिए उन्हें गद्दार और पापी माना जाता था। लेकिन यीशु मत्ती को बुलाते हैं और वह तुरंत सब कुछ छोड़कर उनके पीछे चल पड़ता है। फिर यीशु मत्ती के घर में पापियों और चुंगी लेने वालों के साथ खाना खाते हैं, जो उस समय की संस्कृति में एक बहुत बड़ी बात थी क्योंकि साथ खाना खाने का मतलब था कि आप उन लोगों को स्वीकार करते हैं। फरीसी इस पर सवाल उठाते हैं, लेकिन यीशु का जवाब बहुत स्पष्ट है: वैद्य की जरूरत बीमारों को होती है, न कि स्वस्थ लोगों को। यीशु यह नहीं कह रहे थे कि फरीसी पापरहित थे, बल्कि वह कह रहे थे कि जो लोग अपनी पाप की बीमारी को मानते हैं, वही यीशु के पास आ सकते हैं। यीशु का मिशन धर्मियों को नहीं, बल्कि पापियों को पश्चाताप के लिए बुलाना है। यह सुसमाचार का दिल है: यीशु उन लोगों के लिए आए जो जानते हैं कि वे पापी हैं और उन्हें उद्धारकर्ता की जरूरत है। होशे 6:6 को उद्धृत करते हुए, यीशु बताते हैं कि परमेश्वर बलिदान से ज्यादा दया चाहता है, और यह दया पापियों के प्रति प्रेम और करुणा में दिखती है।

अपनी जिंदगी में यीशु के अधिकार को मानना

जब तुम यह समझ लेते हो कि यीशु के पास पापों को माफ करने का अधिकार है, तो तुम्हारी रोजमर्रा की जिंदगी बदल जाती है। सबसे पहले, तुम अपने पापों को छिपाना बंद कर देते हो। जैसे वह लकवे का मारा हुआ आदमी अपने दोस्तों के साथ यीशु के पास आया, वैसे ही तुम भी अपनी गलतियों को लेकर प्रभु के पास आ सकते हो। घर में जब तुम गुस्सा करते हो या झूठ बोलते हो, तो तुरंत यीशु से माफी मांग सकते हो — तुम्हें किसी और के पास जाने की जरूरत नहीं। दूसरे, तुम दूसरों को भी माफ करना सीखते हो। जब तुम्हारा पति, पत्नी, या बच्चे तुम्हें दुख देते हैं, तो तुम सोचते हो — यीशु ने मुझे कितना माफ किया है, तो मैं भी इन्हें माफ कर सकता हूं। तीसरे, तुम अपने आप को पापी मानने से नहीं डरते। फरीसियों की तरह तुम यह नहीं सोचते कि तुम दूसरों से अच्छे हो। तुम जानते हो कि तुम भी मत्ती जैसे पापी हो, और यीशु तुम्हें भी बुलाते हैं। चौथा, तुम्हारा दिल दूसरे पापियों के लिए नरम हो जाता है। जब तुम किसी को गलत काम करते देखते हो, तो तुम उसे जज नहीं करते, बल्कि उसे यीशु के पास लाने की कोशिश करते हो।

इस हफ्ते के लिए खास कदम

इस हफ्ते, हर रोज सुबह उठकर 5 मिनट के लिए यीशु से बात करो और अपने पापों को उनके सामने रखो — चाहे वह छोटी गलती हो या बड़ी। एक कागज पर लिखो कि तुमने किसको माफ नहीं किया है, और फिर प्रार्थना में उस व्यक्ति को माफ करने का फैसला करो। अगर हो सके, तो उस व्यक्ति से जाकर बात करो और रिश्ता ठीक करो। अपने घर या ऑफिस में किसी एक ऐसे व्यक्ति को ढूंढो जो परमेश्वर को नहीं जानता, और उसके साथ दोस्ती बनाओ — जैसे यीशु ने मत्ती के साथ खाना खाया। उस व्यक्ति के लिए रोज प्रार्थना करो कि वह भी यीशु को जाने। जब तुम्हें कोई मुश्किल आए — बीमारी, पैसे की परेशानी, या रिश्तों में दिक्कत — तो याद करो कि यीशु के पास हर अधिकार है। उनसे मदद मांगो और भरोसा रखो कि वह तुम्हारी सुनते हैं। हर रात सोने से पहले, दिन भर की एक बात के लिए यीशु का शुक्रिया करो — यह तुम्हें याद दिलाएगा कि वह तुम्हारी जिंदगी में काम कर रहे हैं।

  • यीशु ने लकवे के मारे को चंगा करके दिखाया कि उनके पास परमेश्वर का अधिकार है।
  • पाप की माफी सिर्फ यीशु के द्वारा मिलती है, किसी और के द्वारा नहीं।
  • यीशु धर्मी लोगों को नहीं, बल्कि पापियों को पश्चाताप के लिए बुलाते हैं।
  • फरीसी धर्म के नियमों को मानते थे, लेकिन उनका दिल परमेश्वर से दूर था।
  • यीशु का प्रेम हर तरह के पापी के लिए है — कोई भी बहुत बुरा नहीं है।

चिंतन के प्रश्न

  1. क्या तुम अपने पापों को यीशु के सामने खुलकर रखते हो, या तुम उन्हें छिपाने की कोशिश करते हो?
  2. तुम्हारी जिंदगी में कौन सा ऐसा व्यक्ति है जिसे तुमने अभी तक माफ नहीं किया है?
  3. क्या तुम खुद को दूसरों से बेहतर समझते हो, या तुम मानते हो कि तुम भी एक पापी हो जिसे यीशु ने बचाया है?
  4. तुम्हारे आस-पास कौन से लोग हैं जो परमेश्वर को नहीं जानते, और तुम उन्हें यीशु के पास कैसे ला सकते हो?
  5. जब तुम मुश्किल में होते हो, तो क्या तुम सबसे पहले यीशु के पास जाते हो या दूसरी चीजों में मदद ढूंढते हो?
  6. यीशु का अधिकार तुम्हारे डर को कैसे खत्म कर सकता है?
  7. क्या तुम रोज यीशु से अपने पापों की माफी मांगते हो, या तुम सोचते हो कि छोटे पाप कोई बड़ी बात नहीं हैं?

प्रार्थना के बिंदु

हे प्रभु यीशु, मैं तुम्हारा शुक्रिया करता हूं कि तुम्हारे पास पापों को माफ करने का अधिकार है। मैं जानता हूं कि मैं एक पापी हूं और मुझे हर दिन तुम्हारी माफी की जरूरत है। मेरे दिल में जो भी पाप छिपे हैं — गुस्सा, झूठ, घमंड, या कोई और गलती — मैं उन सबको तुम्हारे सामने रखता हूं। कृपया मुझे माफ करो और मेरे दिल को साफ करो। मुझे वह ताकत दो कि मैं भी दूसरों को माफ कर सकूं, जैसे तुमने मुझे माफ किया है। मेरे घर में, मेरे ऑफिस में, और मेरे रिश्तों में मुझे प्रेम और माफी का दिल दो। मेरे आस-पास जो लोग तुम्हें नहीं जानते, उनके लिए मेरे दिल में प्यार भरो, और मुझे हिम्मत दो कि मैं उन्हें तुम्हारे पास लाऊं। जब मैं मुश्किल में होऊं, तो मुझे याद दिलाओ कि तुम्हारे पास हर अधिकार है और तुम मेरी मदद कर सकते हो। यीशु मसीह के नाम से, आमेन।

संबंधित वचन

  • लूका 5:17-26
  • मरकुस 2:1-12
  • यूहन्ना 8:1-11
  • 1 यूहन्ना 1:9
  • इफिसियों 4:32
  • कुलुस्सियों 3:13
  • लूका 19:1-10
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