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बाइबल अध्ययन मार्गदर्शिकाएं, भक्ति और धर्मशास्त्रीय अंतर्दृष्टि — अंग्रेजी, हिंदी और मलयालम में।
170 लेख प्रकाशित
बुद्धिमान और मूर्ख निर्माता
बुद्धिमान और मूर्ख निर्माता - यह अध्ययन हमें दिखाता है कि सच्ची बुद्धिमानी सिर्फ परमेश्वर के वचन को सुनने में नहीं, बल्कि उसे अपनी जिंदगी में लागू करने में है।
सच्चे और झूठे शिष्य
सच्चे और झूठे शिष्य — यह अध्ययन हमें दिखाता है कि केवल 'प्रभु, प्रभु' कहना काफी नहीं है। यीशु ने मत्ती 7:21-23 में चेतावनी दी कि बहुत से लोग उसका नाम लेंगे, लेक
वृक्ष और उसके फल
वृक्ष और उसके फल - यह अध्ययन हमें सिखाता है कि हमारी असली पहचान हमारे जीवन के फलों से होती है। यीशु ने मत्ती 7 में स्पष्ट किया कि अच्छे पेड़ से अच्छे फल और बुरे
संकरा फाटक
संकरा फाटक और जीवन का रास्ता — यह अध्ययन हमें दिखाता है कि परमेश्वर के पास पहुंचने का केवल एक ही रास्ता है, और वह संकरा है। यीशु ने मत्ती 7:13-14 में साफ कहा कि
माँगो, खोजो, खटखटाओ
माँगो, खोजो, खटखटाओ — प्रार्थना में विश्वास और दृढ़ता। यीशु मसीह ने पहाड़ी उपदेश में सिखाया कि परमेश्वर अपने बच्चों की प्रार्थनाओं को सुनता है और उनका जवाब देता
दोष मत लगाओ
दूसरों को दोष देने से पहले अपने आप को देखो — यह अध्ययन यीशु की इस महत्वपूर्ण शिक्षा पर केंद्रित है। मत्ती 7:1-5 में यीशु हमें सिखाते हैं कि हम दूसरों का न्याय क
चिंता मत करो
परमेश्वर की देखभाल पर भरोसा करना — यह अध्ययन हमें सिखाता है कि चिंता करना परमेश्वर पर अविश्वास है। यीशु ने मत्ती 6 में स्पष्ट किया कि हमारा स्वर्गीय पिता हमारी
स्वर्ग में खजाना
स्वर्ग में खजाना इकट्ठा करना — यह अध्ययन हमें सिखाता है कि हमारा असली खजाना कहाँ होना चाहिए। यीशु ने मत्ती 6 में साफ कहा कि धरती का धन नाशवान है — कीड़े खा जाते
उपवास का महत्व
उपवास का सच्चा अर्थ — यह अध्ययन हमें सिखाता है कि उपवास केवल खाना छोड़ना नहीं है, बल्कि परमेश्वर के सामने अपने दिल को नम्र करना है। यीशु ने मत्ती 6 में स्पष्ट क
प्रभु की प्रार्थना
प्रभु की प्रार्थना — परमेश्वर से बात करने का तरीका। यीशु ने अपने चेलों को यह प्रार्थना सिखाई ताकि वे जान सकें कि परमेश्वर से कैसे बात करें। यह प्रार्थना हमें दि
छुपकर दान देना
छुपकर दान देना — परमेश्वर की नज़र में सच्ची उदारता। यीशु मसीह ने मत्ती 6 में सिखाया कि दान देना दूसरों को दिखाने के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर के लिए होना चाहिए।
शत्रुओं से प्रेम
शत्रुओं से प्रेम करना — यह यीशु की सबसे क्रांतिकारी शिक्षा है। यीशु ने मत्ती 5:43-48 में कहा कि हम अपने दुश्मनों से प्रेम करें और उनके लिए प्रार्थना करें। यह सि